Monday, December 22, 2025

HOW TO PREPARE FOR EXAMS / PARIKSHA KI TAIYARI KAISE KAREN?{IN HINDI}

                             HOW TO PREPARE FOR EXAMS ? 

                         परीक्षा की तैयारी कैसे करें ?

 

मनुष्य के जीवन में संघर्ष और चुनौतियां या COMPETITION / स्पर्धा का बहुत महत्व है। जो व्यक्ति अपने समय में किसी भी संघर्ष या स्पर्धा में आगे रहता है वो अपने जीवन में हमेशा सफलता के पायदान पर खड़ा मिलता है क्यूंकि COMPETITION / स्पर्धा सरल नहीं होती। इंसान को अपने आप को बहुत संघर्ष करके उस मुकाम तक पहुँचाना पड़ता है जहाँ वो खुद को सिद्ध कर पाता है और यह तभी संभव हो सकता है जब बचपन से इंसान कड़े EXAMS / परीक्षाओं को पास करता रहा हो।    

 

               HOW TO PREPARE FOR EXAMS ? 

                     परीक्षा की तैयारी कैसे करें ? 


किसी ने सच ही कहा है कि :- 

                            परीक्षा सफलता के दरवाजे होते हैं , 

                           जो आपकी मेहनत के आधार पर ही ,

                                      खोले जाते हैं। 


किसी भी इंसान की सफलता का बहुत सारा श्रेय उसके माता - पिता को भी जाता है क्यूंकि अगर अभिभावक अपनी संतान को बचपन से कठोर नियम से सिखाना शुरू कर दे कि शिक्षा ही जीवन का आधार बनेगी और नित नए EXAMS / परीक्षाओं में सफलता मेहनत के द्वारा ही मिलेगी तो कोई भी बच्चा अपने जीवन में आगे चलकर किसी भी परीक्षा में असफल नहीं होगा। 


शिक्षा की जड़ें कड़वी होती हैं  ,

लेकिन फल मीठा होता है। 

 

The roots of education can be bitter ,

but the result is always sweet .  


परीक्षा की तैयारी कैसे करें :-

 

सबसे पहले यह देखना होगा की आपने कितना समय अपनी पढ़ाई को दिया है और आप  अभी कितना कोर्स पूरा कर पाए हैं। 

अब आप चाहे स्कूल , कॉलेज या किसी भी competition की तैयारी कर रहे हों , परीक्षा की तैयारी के नियम एक जैसे ही हैं।  

सबसे पहला नियम positive रहें। अगर आपको लगता है कि अभी तक आपने ज़्यादा कोर्स की तैयारी नहीं की है तो निराश न हों। 

कहते हैं कि अक्लमंद इंसान वही होता है जो यह जानता है कि जब तक गेंद / बॉल उसके पाले में है तब तक वो हारा नहीं है। 

मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता , खूब मेहनत करें ,एकाग्र होकर। 


आजकल हर इंसान के जीवन में distractions / भटकाव बहुत हैं और इसका सबसे आसान तरीका है " MOBILE " 

MOBILE और दूसरे भटकावों से दूर रहें। 


सुबह अपना ब्रेकफास्ट / नाश्ता जरूर करें जो जयदा heavy / गरिष्ठ ना हो। 

हमेशा अपना time - management / समय - सारणी ऐसी बनायें जिससे आपकी नींद भी पूरी हो सके। 


TIME - TABLE जरूर बनाए जिससे आप अपने सभी विषयों को समान समय दे सकें , जिससे सभी विषय और उसके सार / प्रश्न आपको SOLVE करने और समझने का उचित समय मिल जाए। 

कहते हैं अगर लास्ट / पिछले 10 साल के पेपर SOLVE कर लिये जाए तो निश्चित आपकी EXAM की तैयारी को बल मिलता है। 


हमेशा कोशिश यही करें कि जिस भी TOPIC को पढ़ रहें हैं , समझ कर पढ़ें ऐसा बिल्कुल भी न करें कि रट्टा मार कर पढ़ लें फिर परीक्षा में सब भूल जाए। 

कोशिश करें कि जितना TOPIC अपने पढ़ लिया है उसका खुद TEST लें या किसी को बोलें कि वह आपका TEST लें। 

 

अक्सर कभी - कभी ऐसा भी होता है कि पढ़ते - पढ़ते बहुत मानसिक थकान होने लगती है , उस वक़्त थोड़ी देर के लिए ब्रेक ले , टहले , खूब सारा पानी भी पिए। 

 

अगर आप इस तरह एकाग्र होकर अपनी परीक्षा की तैयारी करेंगे तो निश्चित ही आप सफल होंगे। 




Sunday, August 24, 2025

BAAHY SAUNDARY KYA HAI? / WHAT IS EXTERNAL BEAUTY?

                WHAT IS EXTERNAL BEAUTY ?

                    बाह्य सौंदर्य क्या है ? 


"बाह्य सौंदर्य" का मतलब है जो आँखों से स्पष्ट रूप से दिखाई दे। 

इस संसार में अगर मनुष्य अपने आसपास देखे तो वातावरण में ऐसा बहुत कुछ है जिसे आँखों से देख कर मंत्र मुग्ध हुआ जा सकता है।  

प्रकृति में नदियां , सागर , पहाड़ , झरने , झीलें आदि बहुत कुछ है जो आपको दिखाई देता है और मंत्र मुग्ध भी करता है। 

मनुष्य की बात करें तो उसमें भी दूसरों को मंत्र मुग्ध करने की शक्ति होती है , किसी इंसान में भी कुछ विशेषता होती है जिसे उसका "बाह्य सौंदर्य " या "EXTERNAL BEAUTY " कहा जाता है। 

 

"EXTERNAL BEAUTY " यानि बाह्य सौंदर्य उसे कह सकते है जो दिखाई देता है जैसे किसी इंसान का रंग - रूप , उसका शारीरिक बनावट ,आकर्षक चेहरा और परिधान यानि आकर्षक तरीके से कपड़ों को पहनना। 

समाज में किसी इंसान को जब उसके भौतिक गुण के कारण जाना जाता है तब कहा जाता है कि इंसान का "बाह्य सौंदर्य " ही उसका सबसे बड़ा आकर्षण का कारण है। 

समाज में अक्सर लोग किसी की बाह्य शख्सियत से ही प्रभावित हो जाते है , किसी का आकर्षित तरीके से कपड़े पहनने का स्टाइल हो, या बातचीत करने का अलग अंदाज़ हो , हर इंसान को लुभाता है। 

कहा जा सकता है कि "बाह्य सौंदर्य " में वो गुण है जो लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है क्यूँकि हर इंसान अपने जीवन में भौतिक गुण जैसे किसी के बाहरी व्यक्तित्व " चेहरे की बनावट , शारीरिक बनावट और बाहरी आकर्षक परिधान को देखकर आत्म सुख का अनुभव करता है। 

अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि "बाह्य सौंदर्य न केवल आत्म - मुग्ध करता है वरन यह समस्त मनुष्य की इन्द्रियों को भी आनंद प्रदान करने में अपनी पूर्ण भूमिका निभाता है। 


 


AANTRIK SAUNDARY KYA HAI?/ WHAT IS INNER BEAUTY?

                          WHAT IS INNER BEAUTY ?

                   आंतरिक सौंदर्य क्या है ? 


     "आंतरिक सौंदर्य यानि INNER BEAUTY" 

आंतरिक सौंदर्य से मतलब किसी भी इंसान के भीतरी सौंदर्य से माना गया है। भीतर से मतलब इंसान के व्यवाहरिक गुण , उसके अंतर मन में छिपी करुणा , उसकी अच्छाई , दूसरों के प्रति दया , प्रेम और साथ ही उसके अंदर कितनी बुद्धिमता है और उसका स्वयं का आत्मविश्वास जो उसके चरित्र को भी उज्वल बनाता है। 

आत्मविश्वास से इंसान हर काम को शांति से कर पाता है क्यूंकि शांत मन व्यक्ति की बुद्धि को भी संतुलित करता है और किसी भी विषम परिस्थिति का सामना वह आराम से कर पाता है। 

आंतरिक गुण इंसान को व्यावहारिक , ईमानदार और सद्गुण भी बनाते हैं। जिससे कोई भी आंतरिक गुण प्राप्त इंसान दूसरों के प्रति बिना किसी द्वेष के अपना और साथ ही दूसरों का भी भला करता है।  

उसी इंसान का चरित्र भी उज्वल रह सकता है जो ईमानदार और अपने कर्मों को सही दिशा देता है। 

किसी भी व्यक्ति को उसके आंतरिक गुण / आंतरिक सौंदर्य स्थायित्व भी देते है। 


कहा भी जाता है कि :-

            "व्यक्ति में सुंदरता की कमी हो  

     तो अच्छे स्वभाव से पूरी की जा सकती है 

    पर अच्छे स्वभाव की कमी सुंदरता से कभी 

                पूरी नहीं की जा सकती।" 


Friday, August 22, 2025

sundarta ka matlab kya hai? / what does beauty mean?

            WHAT DOES BEAUTY MEAN ? 

                  सुन्दरता का मतलब क्या है ? 


सुन्दरता / BEAUTY किसी भी इंसान की पहचान बन जाती है। अनगिनत सदियों से सुंदरता इन्सानों को अपनी और आकर्षित  करती रही है। 

सुंदरता केवल स्त्री में हो ऐसा नहीं है , सुंदरता पुरुष को भी सम्मान दिलाती है। 

किसी भी व्यक्ति का सुन्दर दिखना , आकर्षण का केंद्र माना जाता है। 

अगर किसी व्यक्ति का रूप समाज को प्रभावित करता है तो उस व्यक्ति की PERSONALITY/ शख्सियत एक अलग मायना रखती है। 

जैसे अगर कोई कहें कि "किसी शायर की गज़ल 

                                               ड्रीम - गर्ल " 

तो यक़ीनन आपके जेहन में एक ही चेहरा उभरता है - बॉलीवुड स्टार  "हेमा मालिनी " का। 

 

सुंदरता के बारे में ना जाने कितने शायर कितनी गज़ल लिख गए और बॉलीवुड में कितने गीत लिखे गए। 


किसी चेहरे की आकर्षक आँखें , पलकें , लब शायर की कलम को धार देते गए। 

किसी शायर ने लिखा कि :-

 

              "उसके चेहरे की चमक के 

                   आगे सब सादा लगा, 

                आज आसमां में चाँद पूरा  

                   था मगर आधा लगा" 


कुछ लोग जन्म से बहुत सुन्दर ,आकर्षित व्यक्तित्व वाले होते हैं। कहा जाता है कि इनको GOD GIFT मिला है BEAUTY / सुन्दरता का। 

कुछ लोग अपने आप को इस कदर MAINTAIN / बना - सवांर कर रखते हैं कि साधारण होने पर भी वो बहुत आकर्षित करते हैं। 


किसी शायर ने कहा भी है कि :-

      "खूबसूरती न सूरत में है न लिबास में , 

        निगाहें जिसे चाहे उसे हसीन कर दें "

Monday, July 7, 2025

CLIMATE / CHANGES / IMPACT {IN HINDI}

        " CLIMATE / CHANGES / IMPACT" 

                 "जलवायु / परिवर्तन / प्रभाव" 

 

मौसम की बात की जाए तो संसार में अलग - अलग देश हैं और हर देश की अपनी भूगौलिक स्थिति , जलवायु है। जिसका उचित या अनुचित प्रभाव भी सब देशों पर अलग पड़ता है। 

          मौसम और जलवायु में अंतर होता है।  

मौसम किसी स्थान की अल्पकालीन वायुमंडलीय दशाओं का सूचक है। वायुमंडलीय दशाओं में  मेघ , आद्रता , वायुदबाव , बारिश , तापमान और पवन की गति आदि शामिल है। 

मौसम की यह विशेषता है कि यह कभी भी स्थिर न रहकर निरंतर परिवर्तनशील और गतिशील रहता है।मौसम का पूर्वानुमान भी लगाया जा सकता है। 

हमारे दैनिक जीवन पर मौसम का प्रभाव भी पड़ता है। 

 

 जलवायु किसी स्थान के वायुमंडल की लम्बी अवधि की औसत स्थिति है जो मौसम की स्थिति के पैटर्न को दर्शाती है। 

जलवायु को आमतौर पर 30 या उससे अधिक वर्षों 

की अवधि के लिए मापा जाता है। 

मौसम की स्थिति जलवायु से अलग होती है। मौसम अल्पकालिक होता है जबकि जलवायु दीर्धकालिक {लम्बी अवधि} के ढांचे को दर्शाती है।

 

             "CLIMATE CHANGES " 

                   "जलवायु परिवर्तन"

 

जलवायु परिवर्तन तापमान और मौसम के ढाँचे में लम्बे समय तक होने वाले बदलाव है जो प्राकृतिक रूप से हो सकते हैं। 

बाद के समय में ये पाया गया कि मानवीय गतिविधिओं के कारण भी जलवायु परिवर्तन हुआ , मुख्य कारण था - जीवाश्म ईंधन का जलना। 

जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी है। 


             "जलवायु परिवर्तन के प्रभाव "

 

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तापमान में वृद्धि को भी दर्शाता है जिससे जंगल की आग , सूखा और गर्मी बढ़ रही है। 

ग्लेश्यिरों की बर्फ़ पिघलने से समुंदर का स्तर बढ़ रहा है जिससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और कटाव का खतरा भी बढ़ रहा है। 

जलवायु परिवर्तन से मौसम के ढांचे में भी बदलाव आ रहा है।  इसके बदलाव से कहीं सूखा और कहीं बाढ़ की स्थिति बन रही है।  

जलवायु परिवर्तन से पशुधन और फसलों पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा हैं। मनुष्यों में भी बीमारियां बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है , पानी की कमी और भोजन की कमी से कुपोषण का खतरा भी बढ़ जाता है और गर्मी से भी बीमारियां बढ़ जाती है जिसका स्वास्थ्य पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।  


जलवायु परिवर्तन की समस्या बहुत बड़ी है इससे निपटने के लिये इंसान को बहुत जल्द जागरूक होना पड़ेगा और जल्द से जल्द अधिक से अधिक पेड़ लगाने होंगे जिससे कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को अवशोषित किया जा सके। 

ऊर्जा के स्रोतों को भी बढ़ाना पड़ेगा जैसे सौर और पवन ऊर्जा। 

शहरीकरण में भी सुधार करना पड़ेगा , हरियाली और जल प्रबंधन पर भी काम करना पड़ेगा। 

लोगों को जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम से बचने के लिये जागरूक करना होगा , शिक्षित करना पड़ेगा। 

जलवायु परिवर्तन आने वाले समय की एक वैश्विक चुनौती है जिससे सबको बचने के उपाय ढूंढने होंगे और सभी को एक जुट होकर काम करना होगा। 


         🌳🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌴

                                    😊

Friday, July 4, 2025

SOCIAL MEDIA IMPACT {IN HINDI}

                SOCIAL MEDIA IMPACT  

              " सामाजिक माध्यम का प्रभाव "

                  "ONLINE PLATFORM"  


SOCIAL MEDIA को सामाजिक माध्यम भी कहा जाता है। यह ऐसा माध्यम है जहाँ लोग ONLINE आपस में जुड़ते हैं और विभिन्न तरह की जानकारी भी साझा करते हैं। 

इस सामाजिक माध्यम के साथ लोग आपस में बातचीत भी कर सकते हैं और साथ ही अलग - अलग प्रकार की सामग्री भी बना सकते हैं और उसको साझा कर सकते हैं। 

आजकल SOCIAL MEDIA का उपयोग बहुत ज्यादा बढ़ गया है और ऐसा लगता है जैसे ONLINE PLATFORM पर विस्तृत जानकारियां बाढ़ के रूप में हमारे सामने आ गई हों। 

 

     "SOCIAL PLATFORM / सामाजिक मंच" 

इसके अंतर्गत  अलग - अलग तरह के मंच उपलब्ध हैं जिसमें फेसबुक , इंस्टाग्राम , टेलीग्राम,व्हाट्सएप्प, 

आदि आते हैं। जो NETWORKING SITES / PLATFORM आदि के रूप में होते हैं और विभिन्न तरह से सामाजिक मंच प्रदान करते हैं। जिससे वीडियो और टेक्स्ट आदि अपने समुदाय में साझा किया जा सकता है। 


            "SOCIAL MEDIA IMPACT" 

"सामाजिक माध्यम का प्रभाव : अच्छा या बुरा" 

 

सकारात्मक प्रभाव :- सोशल मीडिया समाज को, लोगों को जोड़ने का काम भी करता है। यह दूर बैठे लोगों को भी मंच देता है जिससे लोग आपस में विचार, तस्वीर आदि साझा कर सके। 

त्वरित संचार का माध्यम होने से लोग अपने ज्ञान, शिक्षा ,व्यापार , मनोरंजन आदि में इसका बहुत उपयोग करते हैं। 

 सोशल मीडिया लोगों की चेतना को भी प्रखर बना रहा है , पहले लोग किसी भी प्रकार की जानकारी ना होने पर दूसरों से पूछते थे लेकिन अब सही और सटीक जानकारी स्वयं ही ONLINE हासिल कर लेते हैं। 

 

     "इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी है।"  


सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल भी किया जाता है। जिससे मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। 

कभी - कभी कोई भ्रामक सूचना सोशल मीडिया पर फैला देने पर समाज में डर और भय का माहौल बन जाता है जिससे हालात भी बिगड़ जाते हैं। 

कुछ लोग सोशल मीडिया का दिन - रात उपयोग करते हैं जिससे उनको समाज से अलगाव की स्थिति का भी सामना करना पड़ता है और स्वयं भी अकेलापन और रिश्तों से अलग हो कर मानसिक स्थिति ख़राब कर लेते हैं। 


जिस तरह रात और दिन इंसान को नया जीवन, नया लक्ष्य देते हैं अपना जीवन संवारने के लिये ठीक उसी प्रकार सोशल मीडिया की भी बहुत बड़ी भूमिका है आज 21 सदी में। 

  

आज इंसान को जरुरत केवल यह समझने की है कि व्यक्ति सोशल मीडिया के किस प्रभाव को पाना चाहता है   " सकारात्मक या नकारात्मक "

                          

                                😊

 

 

 



Thursday, July 3, 2025

SOCIAL LIFE IMPACT {IN HINDI}

                   SOCIAL LIFE IMPACT 

                    सामाजिक जीवन पर प्रभाव 


अगर देखा जाए तो मनुष्य का जीवन अपने आप में किसी वरदान से कम नहीं है। इस पृथ्वी पर प्रकृति ने इतने सुन्दर , अलौकिक वातावरण को निर्मित किया है जिसका प्रभाव जनमानस पर पड़ता है। इस धरा पर प्रकृति ने मनुष्य के लिये पेड़ , पौधे , नदियाँ  , झरने , समुन्दर , आकाश इतनी विशाल दिल को मोहित करने वाली रचना की है। 

जिस तरह से प्रकृति ने धरा / पृथ्वी पर अपनी खुबसूरत रचना की है ठीक उसी प्रकार मनुष्य का जन्म भी है। 

मनुष्य का जन्म सिर्फ अकेले रहने के लिये नहीं हुआ और यह संभव भी नहीं हो सकता क्यूँकि इंसान को स्वयं की जरूरतों के लिये दूसरे लोगों की जरुरत पड़ती ही है। 

जिस तरह प्रकृति ने सुन्दर संसार सजाया है उसी तरह ये दुनिया है और इस संसार के साथ जुड़ा हम सब का जीवन है , हमारा सामाजिक जीवन है। 

अब अगर आप समाज के साथ जुड़ाव रखते है तो जरुरी बात है कि आप सामाजिक जीवन के प्रभाव भी महसूस करते होंगे क्यूँकि अलग - अलग धर्म , समुदाय , भाषा के लोग आपके जीवन में आते हैं। 

 

धीरे - धीरे मनुष्य की समाज से जान - पहचान होती है और किसी भी व्यक्ति के सामाजिक जीवन की शुरुआत होती है। 


                  "SOCIAL LIFE IMPACT" 

                  "सामाजिक जीवन पर प्रभाव" 


किसी भी मनुष्य का सबसे पहला जो जुड़ाव होता है , वो अपने परिवार से होता है जिसमें माता - पिता , भाई - बहन और परिवार के अन्य लोग शामिल होते है। इसी पारिवारिक कड़ी में अपने रिश्तेदार और अपने समुदाय के लोग होते हैं जो बचपन से आपके जीवन में शामिल होते हैं और इन सबके साथ भी इंसान का सामाजिक जीवन होता है जिसका प्रभाव इंसान के जीवन पर पड़ता है। व्यक्ति सबसे पहले अपने लोगो के बीच रहकर ही अन्य लोगों से ताल - मेल बनाना सीखता है। 

यकीन मानिये जो व्यक्ति अपने लोगों के बीच रहकर अच्छा व्यवहार करता है और सही गलत का निर्णय करना उचित ढंग से सीख जाता है वही इंसान दुनिया के बाकी लोगों के अच्छे , बुरे प्रभाव को भी बिना तनाव के संभाल सकता है।  

किसी भी व्यक्ति के सामाजिक जीवन में विविधता रहती है , अलग समुदाय के लोग , अलग भाषा , अलग परिस्थिति के लोग , अलग देश - प्रदेश के लोग जिसमें शामिल होते हैं। 

इन सभी सामाजिक लोगों का प्रभाव भी हर इंसान के जीवन में पड़ता है। अगर कोई भी व्यक्ति यह महसूस करता है कि दूसरे लोगों के साथ जुड़कर आप भी अपनी योग्यता , व्यापार , एजुकेशन को बेहतर बना सकते हो तो निश्चित रूप से इसका प्रभाव आपके जीवन को एक सही दिशा देगा और आप निरन्तर अपनी बौद्धिक क्षमता को बढ़ाते हुए , अपने जीवन में प्रगति के पथ पर बढ़ते जायेंगे।    


इसके विपरीत अगर कोई व्यक्ति यह सोचता है कि बिना सामाजिक जीवन वो स्वयं आगे बढ़ता रहेगा तो यह सोच निरर्थक हैं क्यूँकि हर इंसान को परस्पर सहयोग की आवश्यकता होती है इसलिए सामाजिक जीवन हर व्यक्ति की पहली जरुरत है जिससे समाज में रहकर व्यक्ति ना केवल अपना विकास करें बल्कि परिवार ,समाज और अपने देश के विकास में भी भागीदार बनें।

Wednesday, July 2, 2025

HELPFUL NATURE :BLESSING OR CURSE {IN HINDI

            HELPFUL NATURE : BLESSING OR CURSE  

                   मददगार स्वभाव : आशीर्वाद या अभिशाप 


कहते हैं अगर ज़िन्दगी में कुछ करना है या सफलता का स्वाद चखना है तो इंसान को अपने भविष्य को ध्यान में रखकर अपने स्वभाव /बेहेवियर को उम्दा बनाना चाहिए जिससे लोग उसके साथ जुड़ सकें और यह संभव हो सके कि आप अपने जीवन में नित नई उचाइयां हासिल करके अपने जीवन को कामयाब बनाए। 

इंसान सामाजिक प्राणी है , यह अपने आप में ही यह दर्शाता है कि कोई भी व्यक्ति बिना समाज के अधूरा है , आपस में एक - दूसरे की मदद करना , आपस में एक - दूसरे को सहयोग देना और मददगार व्यवहार के कारण अपनी और दूसरों की भी उन्नति करना , समाज में मनुष्य को श्रेष्ठ दर्जा दिलाते हैं।

"भरोसा और आशीर्वाद 

  कभी दिखाई नहीं देते 

            लेकिन 

  असंभव को संभव 

      बना देते हैं।" 


कई बार देखा गया है कि कुछ लोग दिल से दूसरे लोगों की मदद करते हैं। सेवा - भाव भी देखा गया है। निश्छल दूसरों को आगे बढ़ाने की ललक भी कुछ लोगों में होती है। 

दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिनको लगता है कि इनका फ़ायदा उठाया जा सकता है। 

ऐसे लोगों के लिये बड़ी मज़ेदार पंक्तियाँ हैं दोस्तों :- 

 

"जो लोग पहले गन्ने जैसे मीठे होते हैं 

वही लोग मतलब के बाद करेले जैसे 

          कड़वे हो जाते हैं।" 

 

अब प्रश्न यह है कि इंसान का दूसरों के प्रति मददगार स्वभाव उसकी अपनी जिंदगी के लिये आशीर्वाद है या अभिशाप। 

 

इसका सीधा सा जवाब है कि मददगार स्वभाव आशीर्वाद भी है और अभिशाप भी है। 

 

"आशीर्वाद"  इस तरह से कि आपने किसी के लिये कुछ किया , आपको भी ख़ुशी हुई और सामने वाले व्यक्ति को भी आपकी मदद से फायदा हुआ और उसने आपको दिल से दुआएँ दी , आपने भी अपने अंतर्मन में संतुष्टि और ख़ुशी को महसूस किया। 

                                          😊

 

"अभिशाप "  इस तरह से कि आपने किसी जरूरतमंद इंसान की सहायता की और अपना पैसा , मन ,और भाग - दौड़ सब किया लेकिन वो आपको अपमानित और ढगा हुआ सा महसूस करा के चला गया। आपके मन में क्या भाव आयेंगे यही ना कि "काश मैं इसकी मदद ही ना करता। " 

                                            😠😕😓


               "SMART / बुद्धिमान बने  , CLEVER / चतुर बने।" 

 

किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व में चार चाँद लग जाते हैं जब उसका शानदार स्वभाव लोगों के सामने आता है। 

आप अपना स्वभाव बनाए रखें लेकिन बुद्धिमता और चतुराई भी।

 

 

GUSSE KO KAISE CONTROL KARAN {IN HINDI}

                             HOW TO CONTROL ANGER 

                 गुस्से को कैसे नियंत्रित करें ?

 

इंसान ही पृथ्वी पर ऐसा एकमात्र प्राणी है जिसे संज्ञा दी गई है " सामाजिक प्राणी " की। 

व्यक्ति जब भी समाज में दूसरे लोगों से मिलता - जुलता है तब उसके भीतर कुछ भावनायेँ भी उभरती हैं और इन भावनाओं में उसके भीतर समाहित नौ- रसों का बहाव होता है जो समाज में व्यक्ति की छवि को बनाता है। 

किसी भी व्यक्ति के स्वभाव से ही पता चलता है कि उसके व्यक्तित्व की क्या खूबियाँ हैं और क्या दोष। 

आज हम व्यक्ति की उस कमी की बात करेंगे जो समाज में उसके पतन का कारण बनती है वो कमी है " गुस्सा / ANGER "

           HOW TO CONTROL ANGER ?

               गुस्से को कैसे नियंत्रित करें? 

 

                             माचिस  

                  की तरह होता है गुस्सा 

            किसी दूसरे को जलाने से पहले 

                    खुद  को जलाता है।


कभी - कभी यह देखा भी गया है कि व्यक्ति पर गुस्से के बहुत नकारात्मक प्रभाव भी सामने आते हैं जो उसके व्यक्तित्व को धूमिल भी करते हैं और कभी - कभी यह भी देखा गया है कि जब तक इंसान किसी पर गुस्सा ना करें तो लोग उसको कुछ भी नही समझते। अगर ऐसा लगता है कि आपके गुस्सा होने पर परिणाम सकारात्मक आते हैं तब तो ये फिर भी थोड़ा - बहुत सही है लेकिन आपके गुस्से से सब आप से दूर होना शुरू कर दें तो आप को समय रहते ही अपने आप पर नियंत्रण करना शुरू कर देना चाहिए। 

गुस्से को CONTROL करना मुश्किल नहीं है अगर आप इस बात को समझ जाए कि लोग आपके हिसाब से नहीं चलेंगे बल्कि पहले आपको लोगों को उनके अनुसार समझना पड़ेगा। 

पहले आपको जब भी गुस्सा आए तो थोड़ी देर के लिये विचार करके देख लें कि आपको जिस बात से गुस्सा आ रहा है उसका परिणाम क्या होगा और उस बात का समाधान क्या हो सकता है। 

किसी भी व्यक्ति को अगर लगता है कि उसे बहुत गुस्सा आता है तो अपने व्यवहार को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश करें। 

गुस्से की आदत को दूर करने के लिये मानसिक रूप से मज़बूत बनें। 

MEDITATION / ध्यान करें। ध्यान करना चिंता ,भय  से और अवसाद से आपको बचाता है। 

सुबह जल्दी उठने की आदत व्यक्ति को प्रकृति से जोड़ती है। सुबह आप सैर MORNING WALK पर जाए जिससे मन के भीतर नई ऊर्जा / आनंद का संचार होगा जिससे आपके व्यवहार को भी सकारात्मकता मिलेगी। 

समय पर भोजन करें। 

अपने रोज़ के कामों को व्यवस्थित रखें। 

अगले दिन क्या करना है उसकी एक लिस्ट / LIST सोने से पहले बना लें। 

गुस्सा आने का कारण MANAGEMENT का सही ना होना भी हैं इसलिये सब काम समय से करें। समय - प्रबंधन ऐसी कला है जिसने समय की कद्र की उसकी दुनिया ने कद्र की। 

कहते हैं कि :-   दूसरों पर गुस्सा करना 

                           चोट के समान है 

                        खुद पर गुस्सा करना 

                  खुद को तराशने के समान है। 


जब भी गुस्सा आए तो थोड़ी देर उस जगह , परिस्थिति से दूर हो जाए , गहरी सांस लें। 

1 से 10 तक गिनती गिने , 100 तक भी गिन सकते हैं जब तक आपका तनाव दूर ना हो जाए। 

कोई ऐसा काम करने लगे जो आपको पसंद हो,  आपको सुकून देता हो। 

ईश्वर से नज़दीक रहने की कोशिश करें , मंदिर या जिस भी धर्म के आप हों वहां जरूर जाए क्यूंकि ये वो जगह होती है जहाँ सकारात्मक ऊर्जा बहती है,  शांति महसूस होती है, कुछ देर वहां बैठें और फिर शांत चित होकर अपने गुस्से कि वजह और समाधान पर गौर करें। 


                              क्यूँकि 

 

              बुद्धिमान लोग कभी बात बात  

                   पर क्रोधित नहीं होते 

                     और क्रोधित लोग 

               कभी बुद्धिमान नहीं होते।

                                😊

                  

Sunday, June 8, 2025

BEHAVIOR....VYAVAHAAR {IN HINDI}

                            BEHAVIOR

                                व्यवहार  


               अच्छे व्यवहार का आर्थिक मूल्य 

           भले ही ना हो , लेकिन अच्छा व्यवहार 

                          करोड़ों दिलों को 

                खरीदने की ताकत रखता है। 

 

प्रकृति ने इंसान के साथ बहुत खूबसूरत रिश्ता रखा। 

जैसे कह रही हो "मेरा सब कुछ तेरा " 

तभी इंसान इस प्रकृतिक वातावरण में सहजता से अपना जीवन जी सका। 


क्या मनुष्य भी इस प्रकृति से कुछ सीख सकता है ? 

क्या एक संतुलित व्यवहार मनुष्य को सहज बना सकता है ?

        आइये जानते है "व्यवहार होता क्या है ? 

 

जब कोई मनुष्य के रूप में जन्म लेता है तो वो अपने जीवन में कई चरणों से गुजरता है जैसे बाल्यावस्था,  किशोरावस्था और वृद्वावस्था। 

प्रत्येक अवस्था इंसान को धीरे -धीरे दूसरे लोगों के साथ जोड़ती जाती है। 

सबसे पहले जब बच्चा घर में परवरिश पाता है , अपने माता - पिता के सानिध्य में उसका पालन - पोषण होता है। अपने आसपास की दुनिया को समझता है , यहीं से उसके व्यवहार यानि BEHAVIOR को देखा जा सकता है। अगर बचपन से ही बच्चे को सही व्यवहार की शिक्षा दी जाए तो निश्चित रूप से ताउम्र बच्चा अच्छी बातों पर ही अपना ध्यान देगा। अच्छी शिक्षा ,अच्छी परवरिश हमेशा आपको हर कदम भटकने से बचाती है।  

        दूसरी अवस्था होती है किशोरावस्था।  

किशोरावस्था में समझ विकसित होती है और आपने देखा होगा या स्वयं भी महसूस किया होगा कि दूसरे का व्यवहार हमको भी प्रभावित करता है। 

इसी तरह युवावस्था आते ही पूर्ण रूप से इंसान का व्यवहार समाज में दिखने लगता है। जिसका दूसरों पर POSITIVE या NEGATIVE प्रभाव पड़ने लगता है। 

इंसान का BEHAVIOR / व्यवहार हमेशा अच्छा होना चाहिये क्यूँकि समाज़ में आपकी व्यवहार कुशलता ही होती है जो आपको हर FIELD / क्षेत्र का MASTER / मालिक बनाती है। मनुष्य को   सामाजिक प्राणी कहा जाता है इसलिए ये और भी आवश्यक हो जाता है कि आप हमेशा कोशिश करें कि आपका व्यवहार संतुलित और मर्यादित हो जिससे समाज में आपकी छवि धूमिल न हो। 

अक्सर कहा भी जाता है कि :-

                      जीवन में ऊँचे उठते 

                          समय लोगों से 

                     अच्छा व्यवहार करें ,  

                               क्यूँकि 

                       कभी आप नीचे 

                      आए तो सामना  

                  इन्ही लोगों से करना  

                            होगा !!  


जो अपने जीवन में जितना सरल रहा वही सरलता से अपना अंतिम पड़ाव यानि वृद्वावस्था को भी पार कर गया।


कभी - कभी अपने व्यवहार में विनोदपूर्ण स्वभाव भी रखना बहुत जरुरी होता है क्यूँकि कुछ नकारात्मक व्यवहार के लोग जब ज़िन्दगी में मिल जाए तब हमारा हास्यपूर्ण विनोदी स्वभाव उस कटुता को अपने भीतर न जाने दे। 

कहते भी हैं कि :-  मन में उतरना और मन 

                                    से उतरना

                           केवल व्यवहार पर निर्भर

                                   करता है।   


                        "स्वस्थ रहिये , मस्त रहिये"

                            व्यवहार कुशल बनिये 

                                      दिल से... 

                                           😊 


HOW TO PREPARE FOR EXAMS / PARIKSHA KI TAIYARI KAISE KAREN?{IN HINDI}

                             HOW TO PREPARE FOR EXAMS ?                           परीक्षा की तैयारी कैसे करें ?   मनुष्य के जीवन में संघर्ष ...