Wednesday, July 28, 2021

HOW TO MAINTAIN YOUR BUDGET: GHARELU KHARCHAI KAISY PURAY KAREN?

     "HOW TO MAINTAIN YOUR BUDGET"

                     घरेलु खर्चे कैसे पूरे करें?

 

                         एक वक़्त था, जब कहा जाता था कि मुट्ठी में पैसे ले जाते थे और थैला भर कर सामान लाते थे। आज वो वक़्त है जब , थैला / बैग भरकर पैसा ले जाते हैं और मुट्ठी भर सामान आता है। 

                           😒😓😔😕😖 


               ☕🍞🍟🍛🍅🍇🍩🍪🍨🍎


                             दोस्तों ,  पहले परिवार का एक इंसान काम करता था और पूरा परिवार सुख से गुजारा कर लेता था लेकिन आज पूरा परिवार काम करता है तब कहीं सही तरीक़े से घरेलू ख़र्चे पूरे पड़ते हैं , कहीं - कहीं तो उसमें भी बहुत  परेशानियां और उलझनें हैं। 

 

                              आज आप देख ही रहें हैं कि महँगाई कितनी ज्यादा है और परिवार में हर सदस्य की अपनी ज़रूरतें। 

 

                           अगर आपको घर से बाहर जाना है तो आपको सबसे पहले अपना two wheeler / four wheeler चाहिये। 

 

               इंसान की पहली जरूरत खाना / भोजन है जिसके लिये GROCERY / किराणा से सामान चाहिये। 

 

               बच्चों की शिक्षा के लिये अच्छा स्कूल चाहिये। 

 

              अच्छे कपड़े पहनने के लिये होने चाहिये ताकि समाज़ में WELL DRESSED , HIGH PROFILE दिखाई दें। 

 

कोई परिवार का बुज़ुर्ग सदस्य अगर बीमार हो जाए तो उसके इलाज़ के लिये आजकल हज़ारों नहीं , लाखों रुपए ख़र्च करने पड़तें हैं।

 

 

   यह कहना शायद गलत नहीं होगा कि हर पीढ़ी के सामने यही सवाल होता है कि बहुत महँगाई है। यानि हम यह कह सकते हैं कि महँगाई का topic / विषय ऐसा मुद्दा है जो ज्वलंत विषय है या स्पष्ट शब्दों में कहूँ तो   "TIMELESS PROBLEM"


   आजकल financial problem / वित्तीय समस्या की बहुत समस्या है। इन्सान जितना भी कमाता है वो कम ही पड़ता है। 


PETROL / पेट्रोल ,  DIESEL /डीज़ल , LPG GAS 

PRICE / दाम बढ़ने के साथ सभी चीज़े महँगी हो जाती हैं , जिसकी वज़ह से घरेलू ख़र्चे पूरे करने में भी बहुत परेशानी होती है। 

 

      "HOW TO MAINTAIN YOUR BUDGET"

                              😖😠😓 


      MAKE SMARTLY MONTHLY BUDGET

                               😊👪😊

 

          महीने का खर्चों का हिसाब किताब चतुराई से बनाये 

              USE   50 : 30 : 20  FORMULA 

 

                 सभी परिवारों की आय अलग - अलग होती है , 

लेकिन जरूरतें सबकी एक जैसी ही होती है : रोटी, कपड़ा, मकान। 

 

                    रोटी , कपड़ा और मकान के साथ अब परिवार के सदस्यों की इच्छायें यानि wish भी जुड़ गई है और बचत करना भी।

 

{1}   50 : घर की मुख्य जरूरते 

 

{2}   30 : परिवार की wish / चाहतों के लिये 

 

{3}   20 :  बचत के लिये 


                    हो सकता है कि अब आप सोच रहें होंगे , यह कैसे होगा क्यूँकि आय तो उतनी ही है। 

 

                                                  अब आप अगर सम्भव हो तो अपने पिता जी की आय पूछें , साथ ही साथ उस वक़्त की सभी चीज़ों का भाव। अगर आपके पिता उस वक़्त घर चला लेते थे , सारे खर्च पूरे कर लेते थे लेकिन बचत कम होती थी या ना भी कर पातें हों क्यूँकि पहले तीन / चार बच्चे होते थे जिससे ख़र्चे भी जायदा थे लेकिन आज के समय में बच्चे चाहे एक / दो ही हों लेकिन life style बहुत ख़र्चीला बन गया है। 

 

                          daily needs / रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करें , बहुत किफ़ायत से। 

 

               स्टाइल और स्टेटस के चक्कर में अपने बजट की धज्जियाँ मत उड़ाना क्यूँकि जरूरत के वक़्त आप अपने मैदान में अकेले खिलाड़ी होंगे। 

 

                दोस्तों , आज फिर से अपना बजट बनाओ , देखो आपकी आय का कौन - सा हिस्सा फ़िज़ूलखर्च है।  उस बचे हुए पैसों को आप बचत के रुप में सहेज कर रखें और भविष्य में उसी बचत से आप कुछ बेहतर कर सकतें हैं।

                                 

      धीरे - धीरे ही सही , बूंद-बूंद से घट भरता है। 

 

                           🙏😇🙏



 

RELATIONSHIP BETWEEN MOTHER AND SON: MAA BETA KE SAMBANDH KAISE HONE CHAHIYAI?

  "RELATION BETWEEN MOTHER & SON"

            माँ बेटे के सम्बन्ध कैसे होने चाहिये ? 

 

                    "माँ"  वो शब्द जिसको बच्चा सबसे पहले बोलना सीखता है और माँ के गर्भ से ही उसके साथ अपना सम्बन्ध महसूस करता है , इसी तरह माँ भी बच्चे की धड़कन को ताउम्र महसूस करती है,वो माँ के पास हो या दूर "माँ " को बच्चे की फ़िक्र हमेशा रहती है। 

 

           किसी ने क्या खूब कहा है :-

 

                सारी रौनक़ देख ली 

                  ज़माने की मगर..

            जो सुकून तेरे पहलू में है 

                  वो कहीं भी नहीं।  

                           

                                माँ बच्चे की प्रथम पाठशाला कही जाती है। माँ ही बच्चे को बोलना सीखाती है , उसमें भी सबसे पहला शब्द "ॐ " या फिर "राम राम " ही होता है। 

                                          अक्सर लोग कहते हैं कि माँ के लिये बेटा ही आँख का तारा होता है और माँ अपनी परवरिश में अक्सर यह भूल जाती है कि जायदा लाड़ - प्यार से बच्चे बिगड़ भी जाते हैं। शायद यह सही भी हो सकता है क्यूँकि कहीं - कहीं आज भी बेटों को ही ज्यादा माना जाता है लेकिन अब सब जगह ऐसा नहीं है। आज बेटा - बेटी दोनों को ही समान प्यार और परवरिश दी जाती है। 

                

               माँ और बेटे के सम्बन्ध कैसे होने चाहिये :-

 

                                    अगर देखा जाए तो हर माँ अपने बेटे से बहुत प्यार करती है। बेटे को जन्म देने के बाद से ही उसकी हर कोशिश होती है कि उसका बेटा सबसे अच्छा और काबिल बने। बेटे को भी अपनी माँ से बहुत प्यार होता है। 

                                          जब तक बेटा छोटा है तब तक तो माँ को अपने बेटे की हर मांग जायज़ लगती है और अगर माँ को ना भी लगे तब भी परिवार के बाकी सदस्य कह देते हैं कि  "कोई बात नहीं बच्चा है" लेकिन समय के साथ बच्चे में बहुत सारी बातें , आदतें ऐसी बन जाती है कि बाद में उन खराब आदतों के कारण बेटा अपनी लाइफ में struggle / संघर्ष नहीं कर पाता और failure / हार का सामना करता है। 

                    

                  21 st century / सदी में माँ के पास अपने बच्चों की परवरिश के साथ -साथ इस बात की भी बागडोर हाथ में आ गई है कि वो अपने बेटे का carrier or उसकी life की हर छोटी - बड़ी प्रॉब्लम को solve करें। मानिये यकीन , इस अधिकार को आज 21 st century में पाकर हर माँ के चेहरे पर रौनक है क्यूँकि जिस बेटे को नौ महीने अपनी कोख में संभाला उसको ज़िन्दगी में संभालना कौन - सी बड़ी चुनौती है। 

 

      "21st century or relationship between mother and son"

 

                          क्या आज यह आसान है ?


                  हम तो यही कहेंगे कि आज के दौर में बच्चों की परवरिश उस आग के दरिया के समान है जिसमें डूब के जाना है। 

 

                आज माँ सिर्फ़ रसोई , कपड़ों और बाकी जरूरतों को ही नहीं पूरा करती , बल्कि माँ को बेटे की education / शिक्षा , friends , extra other activities पर भी पूरी नज़र रखनी पड़ती है। कभी -कभी तो माँ को बेटे से सुनना पड़ता है कि आप रहने दो , आप से नहीं होगा , या आप को नये ज़माने की समझ नहीं है। 


                 माँ - बेटे के सम्बन्ध अच्छे हों इसके लिये दोनों के बीच आपसी समझ बेटे के बचपन से ही विकसित करनी बहुत जरुरी है। 

 

            बहुत जरुरी है कि माँ भी आज के समयनुसार स्वयं को update रखे ताकि 21st century के up - downs को समझे और बेटे के भीतर भी इस बात का विश्वास हो कि माँ से मैं हर प्रॉब्लम और decision share कर सकता हूँ। 

                              

                         इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी है कि दीवारें तभी ज्यादा ऊँची होंगी जब नींव मज़बूत होगी इसलिये पहल माँ को ही करनी होगी जिससे माँ - बेटे के सम्बन्धों में अपनापन और समझदारी की ऐसी नींव पड़ें कि उम्र भर माँ - बेटे के सम्बन्ध बहुत मधुर बने रहें। 

       

                           🙏😊🙏

 

 

 

                

 

HOW TO PREPARE FOR EXAMS / PARIKSHA KI TAIYARI KAISE KAREN?{IN HINDI}

                             HOW TO PREPARE FOR EXAMS ?                           परीक्षा की तैयारी कैसे करें ?   मनुष्य के जीवन में संघर्ष ...