BEHAVIOR
व्यवहार
अच्छे व्यवहार का आर्थिक मूल्य
भले ही ना हो , लेकिन अच्छा व्यवहार
करोड़ों दिलों को
खरीदने की ताकत रखता है।
प्रकृति ने इंसान के साथ बहुत खूबसूरत रिश्ता रखा।
जैसे कह रही हो "मेरा सब कुछ तेरा "
तभी इंसान इस प्रकृतिक वातावरण में सहजता से अपना जीवन जी सका।
क्या मनुष्य भी इस प्रकृति से कुछ सीख सकता है ?
क्या एक संतुलित व्यवहार मनुष्य को सहज बना सकता है ?
आइये जानते है "व्यवहार होता क्या है ?
जब कोई मनुष्य के रूप में जन्म लेता है तो वो अपने जीवन में कई चरणों से गुजरता है जैसे बाल्यावस्था, किशोरावस्था और वृद्वावस्था।
प्रत्येक अवस्था इंसान को धीरे -धीरे दूसरे लोगों के साथ जोड़ती जाती है।
सबसे पहले जब बच्चा घर में परवरिश पाता है , अपने माता - पिता के सानिध्य में उसका पालन - पोषण होता है। अपने आसपास की दुनिया को समझता है , यहीं से उसके व्यवहार यानि BEHAVIOR को देखा जा सकता है। अगर बचपन से ही बच्चे को सही व्यवहार की शिक्षा दी जाए तो निश्चित रूप से ताउम्र बच्चा अच्छी बातों पर ही अपना ध्यान देगा। अच्छी शिक्षा ,अच्छी परवरिश हमेशा आपको हर कदम भटकने से बचाती है।
दूसरी अवस्था होती है किशोरावस्था।
किशोरावस्था में समझ विकसित होती है और आपने देखा होगा या स्वयं भी महसूस किया होगा कि दूसरे का व्यवहार हमको भी प्रभावित करता है।
इसी तरह युवावस्था आते ही पूर्ण रूप से इंसान का व्यवहार समाज में दिखने लगता है। जिसका दूसरों पर POSITIVE या NEGATIVE प्रभाव पड़ने लगता है।
इंसान का BEHAVIOR / व्यवहार हमेशा अच्छा होना चाहिये क्यूँकि समाज़ में आपकी व्यवहार कुशलता ही होती है जो आपको हर FIELD / क्षेत्र का MASTER / मालिक बनाती है। मनुष्य को सामाजिक प्राणी कहा जाता है इसलिए ये और भी आवश्यक हो जाता है कि आप हमेशा कोशिश करें कि आपका व्यवहार संतुलित और मर्यादित हो जिससे समाज में आपकी छवि धूमिल न हो।
अक्सर कहा भी जाता है कि :-
जीवन में ऊँचे उठते
समय लोगों से
अच्छा व्यवहार करें ,
क्यूँकि
कभी आप नीचे
आए तो सामना
इन्ही लोगों से करना
होगा !!
जो अपने जीवन में जितना सरल रहा वही सरलता से अपना अंतिम पड़ाव यानि वृद्वावस्था को भी पार कर गया।
कभी - कभी अपने व्यवहार में विनोदपूर्ण स्वभाव भी रखना बहुत जरुरी होता है क्यूँकि कुछ नकारात्मक व्यवहार के लोग जब ज़िन्दगी में मिल जाए तब हमारा हास्यपूर्ण विनोदी स्वभाव उस कटुता को अपने भीतर न जाने दे।
कहते भी हैं कि :- मन में उतरना और मन
से उतरना
केवल व्यवहार पर निर्भर
करता है।
"स्वस्थ रहिये , मस्त रहिये"
व्यवहार कुशल बनिये
दिल से...
😊
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