Saturday, June 26, 2021

RELATIONSHIP BETWEEN MOTHER AND DAUGHTER / MAA AUR BETI KA RISHTA KAISA HONA CHAHIYAI?

                             RELATIONSHIP BETWEEN 

            "MOTHER AND DAUGHTER" 

 

              इस संसार में ईश्वर की बनाई हुई सबसे सुन्दर कृति /रचना 

नारी को माना जाता है क्यूँकि एक औरत घर को संवारने / सजाने के 

साथ -साथ , अन्नपूर्णा बनकर पूरे परिवार का ख्याल रखती है। 

                      

                    जब संसार की रचना हुई तभी से नारी को इस संसार की 

सृष्टि को आगे बढ़ाने में  "माँ" बनकर संपूर्ण नारीत्व प्राप्त हुआ। 

 

                     सम्बन्धों की जब बात की जाती है तो एक औरत कई 

रिश्तों में बंधी मिलती है और इन सभी रिश्तों में कभी बहू बनकर, 

 कहीं भाभी , बहन ,ननद , सास ,नानी ,दादी , तो कहीं बेटी। 


               देखा जाए तो एक औरत , बेटी बनकर पूरी ज़िन्दगी सारी

 भूमिकायें बहुत ही प्रेम और कड़े नियमों को मान कर निभाती है। 


              किसी भी परिवार को देखा जाए तो वहां बेटियां अपने आँगन 

में हंसती - खिलखिलाती , अपनी शिक्षा पूरी करती बड़ी हो रही होती हैं

 लेकिन उनकी सही परवरिश की ज़िम्मेदारी उसकी माँ को ही सौंप दी 

जाती है। 

                          

                   " क्या कभी आपने सोचा है कि किसी भी लड़की की ज़िम्मेदारी  सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी माँ को ही क्यूँ सौंपी जाती है ?"

 

                     क्यूँकि एक माँ अपनी बेटी को नौ महीने तक अपनी कोख़ में रखती है और तभी से माँ अपनी बेटी की हर आहट , हर धड़कन को पहचानती है और सबसे खास बात यह कि बेटी के मन को , जरूरतों को, एक माँ खुद एक औरत होने की वज़ह से अच्छी तरह समझ सकती है। 


   "अब बात करते हैं कि माँ और बेटी के सम्बन्ध कैसे होने चाहिये।" 

 

                जब तक बेटियां छोटी होती हैं तब तक बेटी भी अपनी माँ को

 अपना आदर्श / roll model मानती है और माँ भी अपनी बेटी को हर 

सुख -सुविधा देती है। बचपन से ही सही - गलत का फर्क एक माँ ही 

अपनी बेटी को समझाती है।

 

            ज्यों ज्यों बेटी की उम्र बढ़ती है , बेटी का खुद का दायरा भी 

बढ़ता जाता है तब उसकी अपनी समझ भी बढ़ने लगती है , उसकी 

शिक्षा , बेटी को सही -गलत की समझ अपने नज़रिये से समझ आने 

लगती  हैं और फिर शुरु होते है वो सवाल , जिसका जवाब माँ कभी 

कभी जानते हुए नहीं दे पाती। 

 

                         21st century / 21 वीं सदी , माँ और बेटी को आपसी 

सम्बन्धों को निभाने में बहुत सक्षम बना रही है। आज माँ -बेटी के 

सम्बन्ध दोस्ताना हो गए हैं। आज माँ बेटी के लिये फैसले लेती है और 

बेटी भी अपनी माँ को भरपूर सहयोग करती है। ऐसा नहीं है कि 

आपस में माँ -बेटी की तकरार नहीं होती , आज भी बहुत सारे प्रश्न होते 

है बेटियों के लेकिन माँ के पास भी सटीक जवाब होता है जो पहले मायें 

नहीं दे पाती थी क्यूँकि एक लेवल के बाद पिता या बड़ा भाई या घर के

 बुज़ुर्ग सदस्य ही उसका जवाब देते थे। 


                          अगर कोई परिवार अपनी बेटियों को सही परवरिश ,

सही - गलत का फैसला कैसे करना है , ख़ुद को कितने लेवल / कितनी 

सीमाओं तक सीमित रखना है , यह सब समझा देता है , खासकर माँ , 

और बेटियाँ भी थोड़ा सा अपनी समझ - बूझ को विकसित करके 

 अपनी माँ के साथ अपने सम्बन्ध और अपना जीवन दोनों ही बेहतर 

बना सकती है।

                            

                  हमेशा बेटियों को इस बात के लिए अपनी माँ का सम्मान 

करना चाहिये कि जिन बातों के लिये उनकी माँ को permission / 

सहमति नहीं मिली   "उच्च -शिक्षा , अकेले सफ़र करना , घूमना 

-फिरना , education के लिये hostel में रहना , और भी life के बहुत 

सारे question -marks ??????????????????


             आज 21 वीं सदी में , कोई भी , किसी भी क्षेत्र में अपना मुकाम 

बना सकता है। 


                    सही मायने में देखा जाए तो माँ -बेटी के पास साथ में 

जीवन जीने के लिये सिर्फ़ ज़िन्दगी के 25 साल ही होते हैं बाकी का 

जीवन तो दूसरे संबंधों को निभाने की ओर मुड़ जाता है इसलिये और 

भी बहुत जरुरी है कि माँ -बेटी मिलकर अपनी ज़िन्दगी में ऐसे प्रयास 

करें जिससे माँ भी और बेटी भी समाज के सामने अपना सिर ऊंचा 

करके रहें।

                          

                   देखा जाए तो माँ - बेटी का सम्बन्ध वास्तव में बहुत 

खूबसूरत होता है।  आपसी समझ और प्यार से इसे और भी खूबसूरत 

बनाया जा सकता है। 


                                             🙏😊🙏

 

Friday, June 25, 2021

RELATIONSHIP BETWEEN FATHER AND SON / PITA PUTR KE SAMBANDH KAISE HONE CHAHIYAI?

 RELATIONSHIP BETWEEN FATHER & SON

 

        " पिता - पुत्र के सम्बन्ध कैसे होने चाहिये?"

 

                             क्या देश और क्या विदेश , जब भी संबंधों की बात होती है तो अक्सर देखा गया है कि हर इन्सान का अपनों के साथ बहुत ही प्यार और लगाव का रिश्ता होता है।  

                                   

                           पिता -पुत्र का रिश्ता भी बहुत ही भावनात्मक कहा जाता है। कुछ दशकों पहले हमारे घरों  में पुत्र को बहुत जायदा तवजो दी जाती थी , आज भी प्यार करते हैं लेकिन पुत्र के साथ - साथ बेटी को भी तवजो / महत्त्व / मान दिया जाता है। 

 

                 बात चाहे किसी भी घर या देश की हो , पिता और पुत्र के बीच understanding को महत्व दिया जाता है। किसी भी पिता के लिये वो पल / वक़्त बहुत फक्र / सम्मान का होता है जब उसका बेटा कोई सम्मान प्राप्त करता है। 

 

            पिता और पुत्र के बीच सामंजस्य / तालमेल का होना बहुत जरुरी है क्यूँकि परिवार की जिम्मेदारी आगे चलकर पुत्र को ही निभानी होती है। 

 

                             पिता और पुत्र के रिश्ते में अपनापन तो होना ही चाहिये ,  साथ ही साथ पिता को 

पुत्र को अनुशासन का पालन भी सीखाना चाहिये जिससे बेटा अपने जीवन को भी समझदारी के साथ , 

सुचारू रुप से  चला सके। 

                               बदलते वक़्त में , नए आविष्कारों को किस तरह समझना है , इसकी जानकारी 

भी पिता और बेटे को आपस में जरुर share करनी चाहिए। 

                            बचपन से ही पिता अपने बेटे को सीखने की आदत डाले , खेल -खेल में कुछ 

puzzles solve करने दे जिससे आगे चलकर बेटा life में आनेवाली problems को आसानी से solve

 कर सके। 

 

                       जितना पिता technology को सिखाय उतना ही ध्यान अपने बेटे को संस्कारों को 

सीखाने में भी लगाए जिससे बेटा जब बड़ा हो तब दोनों के सम्बन्ध मर्यादित हों , सफल जीवन तब ही 

सम्भव है जब आपके परिवार में सब लोग आपसी प्रेम , जागरूकता और कामयाब होकर अपने कार्यों 

में , रोज़गार में भी सफल हों। 

                                              

       " सम्बन्ध उतने ही निखरते हैं जितना हम संबंधों के साथ सही दिशा में मेहनत करतें हैं।"

 

 " कहते हैं कि बेटी को परखना है तो माँ को देखो और पुत्र की आदतों को देखना है तो पिता को" 


             हर पिता को चाहिए कि अपने बेटे को बचपन से ही अपने नज़दीक होने का अहसास 

करवाता रहे जिससे युवावस्था में बेटा अपने पिता से अपनी सारी problems , happiness , query सब 

कुछ आसानी से शेयर कर सके। 

 

                                  बेटे को भी अपने पिता के मान - सम्मान को मानते हुए , अपनी life को आगे 

बढ़ाना चाहिये। कई बार life में बहुत बार परेशानियां आती है जिसका solution हर पिता आसानी से 

कर देता है क्यूँकि हर पिता , कभी खुद भी जीवन के उस दौर से निकल कर आता है। 


" बहुत आसान है अपने बेटे को डांट देना , उसकी छोटी -बड़ी गलती पर बेटे को नकारा कह देना।"

 

                                                                  YA 

 

                        " बहुत आसान है अपने पिता को पुराने ज़माने का कह देना"

 

 

                                                            लेकिन 

 

                         इतना मुश्किल कभी भी नहीं है 

 

बेटे का अपने पिता को प्यार से पापा कहकर गले से लिपट जाना और पिता का अपने बेटे को कसकर अपनी बाँहों में बचपन जैसा समा लेना।     


                     दोस्तों , परिवार है ,अपना खून है ,अपने माता-पिता हैं , अपने बच्चे हैं। 

 

            "सम्बन्धों को संभाल कर रखें क्यूँकि अपनों में और अपने जैसों में बहुत अंतर होता है।"

 

                                                              🙏😊🙏



 

 

       

 

 

 

 

 


Wednesday, June 16, 2021

RELATIONSHIP SERIES: RELATIONSHIP BETWEEN DAUGHTER AND FATHER

                "RELATIONSHIP BETWEEN 

                     FATHER & DAUGHTER"

 

                          विश्व / WORLD / संसार का हर इन्सान अपने 

सम्बन्धों की कद्र करना जानता है क्यूँकि हर वो शख़्स / person जो 

अपने आप की value जानता है उसे एक बात अच्छी तरह से पता है 

कि अगर अपने जीवन को पूर्णता से जीना है तो जिन्दगी में हर रंग 

होना चाहिये और इन्हीं खूबसूरत रंगों में सबसे शोख़ और चटक रंग

से चमकता है हमारा परिवार। 

 

                                     परिवार के साथ केवल सुख ही नहीं होता , 

कभी - कभी दुःख भी आते हैं जिसको पूरा परिवार मिलजुलकर दूर 

कर लेता है। 

 

   परिवार में एक ऐसा रिश्ता है जो बहुत कोमल ,मासूम और नाज़ुक 

सा होता है जिसकी भोली सी मुस्कान , जो खिलखिलाती, हँसते हुए ,

सारे परिवार को अपना बना लेती है , वो हैं हम सबकी प्यारी चहेती 

                                  😄😃😂😁😀😇

                                "बेटियाँ / DAUGHTER"

 

                         एक पिता / FATHER के लिये उस की बेटी किसी 

परी से कम नहीं होती। किसी भी पिता की "आँखों का तारा" और 

"पिता का अभिमान " होती है उसकी बेटी। 


                      आज 21 st century / सदी में , पिता और पुत्री के 

सम्बन्धों को बेहतर ढंग से समझना बहुत जरुरी हो गया है। बदलती 

परिस्थितियां , भागती -दौड़ती ज़िन्दगी , परिस्पर्धा , नित नए  

 आविष्कार / technology, बहुमुखी क्षेत्रों में विकास ,इन सबको एक 

पिता को जानना - समझना इसलिये और भी जरुरी है क्यूँकि आज 

अगर अपनी बेटी को highly educated , पढ़ा -लिखा शख़्स बनाना 

है तो पहले अपने आपको, इस बदलती परिस्थिति को समझना होगा। 

 

                      कोई भी रिश्ता हो , हर इन्सान प्यार और सम्मान के 

साथ अपने जीवन को जीने के लिये दूसरे व्यक्ति की मदद भी चाहता 

है और अगर बात बेटियों की हो , तब तो बेटियां अपने जीवन के हर 

फ़ैसले को अपनी मर्ज़ी से नहीं लेती हैं।  

                

                                बेटी अपनी माँ से अपनी इच्छा बताती है और 

फिर माँ पिता को बताती है कि बेटी क्या करना चाहती है फिर सही -

गलत की मोहर लगती है, permission मिली तो सही और अगर नहीं 

मिली तो बेटी को  अपने  "क्यूँ नहीं " का जवाब नहीं मिलता। 


                      "21st CENTURY  / 21वीं सदी "  


                 "ROLE  OF FATHER :: पिता की भूमिका" 

 

         हर पिता अपनी बेटी से बहुत प्यार करता है और हमेशा यही 

चाहता है कि उसकी बेटी सुख से रहे,उसे कोई कमी न महसूस हो 

अपने -अपने सामर्थ्य के अनुसार हर पिता बेटी की उचित देखभाल 

करता रहा है।

                 "अब देखभाल के नज़रिये में फ़र्क लाइये।"

 

                          बदलती परिस्थितयों और कड़े संघर्षों को देखते हुए 

अपनी बेटी के साथ  "MENTOR" यानि "गुरु "की भूमिका निभाइये। 

अब वक़्त बहुत challenging or demanding है इसलिये अपनी 

बेटी को बचपन से ही होशियार बनाइये , हर skill सिखाई जाए। 

              

                                           बेटी जब बड़ी होती है तो अक्सर 

parents / माता -पिता उसकी शादी / marriage के लिये लाखों का 

ख़र्च कर देते हैं लेकिन जब बेटी की high - education यानि उच्च - 

शिक्षा की बात होती है तो अक्सर लोग मना कर देते हैं। आजकल यह 

कहा जाने लगा है कि "इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि विवाह

 सफल होगा परन्तु इस बात की पूरी गारंटी है कि शिक्षा से जीवन 

सफल होगा ही होगा।"


               एक पिता होने के नाते अगर आप समझदारी से बेटी का साथ देते हैं तो यकीन मानिये "पिता -पुत्री का यह सम्बन्ध बहुत खूबसूरत,  विश्वास और प्यार से भरा होगा।" 

 

                         "21ST CENTURY / 21 वीं सदी " 

 

               "ROLE OF DAUGHTER :: बेटी की भूमिका "

 

                         जीवन में किसी भी बेटी को अपने माता -पिता का 

प्यार -दुलार , उचित देखभाल और जीवन के संघर्षों में अगर उनका 

साथ मिल जाए तो खुद पर नाज़ करना चाहिये। 

 

               "अब जीवन जीने के नज़रिये में फ़र्क लाइये " 

 

                          बेटी को भी अपने जीवन के challenges, संघर्षों 

को समझना चाहिये। 21st century में आप एक उच्च - कोटि के 

technology / तकनीकी युग में जी रहीं हैं , जहाँ आप हर नॉलेज से 

ख़ुद को update रख कर अपने आप को उच्च मुकाम पर पहुंचा 

सकतीं हैं। 

                         

                 अगर आपको आपके पिता अपना पूरा सहयोग देते हैं तो 

उनका पूरा सहयोग लें और स्कूल से लेकर कॉलेज की शिक्षा कोअच्छे 

अंकों से पास करें। education के साथ ही साथ हो सके तो कोई ना 

कोई technical / तकनीकी ज्ञान /knowledge भी जरूर लें जिससे 

आपको नौकरी मिलने में आसानी हो और आप उच्च स्थान हासिल 

करके अपना और अपने माता - पिता का मान बढ़ाये। 


                  पिता को बेटी अगर कोई उपहार देना चाहती है तो वह 

यही हो सकता है कि आप समाज में अपना एक सफल जीवन , उच्च 

मुकाम बनाये।  अपने पिता के साथ बेटी की इससे जायदा खूबसूरत 

bonding / सम्बन्ध और कुछ नहीं हो सकता। 

 

                                       😊🙏😊




 






     

 

                                                

Tuesday, June 1, 2021

RELATION BETWEEN HUSBAND AND WIFE : PATI PATNI KA SAMBANDH KAISA HO?

"RELATION BETWEEN HUSBAND N WIFE"

 

             सृष्टि के निर्माता की सबसे खूबसूरत रचना स्त्री और पुरुष , 

जिनके संगम से निर्माण होता है जीवन का। जिस दो इन्सान को 

भगवान ने जीवन का निर्माण करने का निमित्त बनाया है , उन दोनों का

 आपसी रिश्ता भी बहुत सुन्दर और प्यार भरा होना ही चाहिए। 

 

क्यों ज़रुरी है पति पत्नी के रिश्ते में सामंजस्य :-

 

         पति पत्नी का रिश्ता वो रिश्ता है जो सृष्टि में सबसे पहले आता है इसके बाद यही रिश्ता माता-पिता की भूमिका में बदल जाता है और सम्मान की दॄष्टि से देखा जाता है। जब बात होती है आपसी सम्बन्ध की तब इस रिश्ते से यही उम्मीद होती है कि पति -पत्नी का आपसी सम्बन्ध बहुत मज़बूत हो जिससे दोनों मिलकर अपने जीवन में आनेवाले हर संबंध और विभिन्न तरह के संघर्षों का मिलकर सामना कर सकें। इन दोनों के आपसी समान विचार , आपसी प्रेम , आपसी विश्वास ही गृहस्थी की नौका को सही दिशा दे सकेंगे। 

                              पति पत्नी का रिश्ता मज़बूत और सामंजस्य वाला इसलिये भी होना ज़रुरी है क्यूँकि इंसान एक सामाजिक प्राणी माना जाता है और इसी बात को ध्यान में रखकर पति पत्नी को आपसी प्रेम और विश्वास की नींव को बहुत मज़बूत रखना चाहिये। 

                          पति पत्नी के रिश्ते को परिवार के बाकी रिश्तों को भी निभाना होता है जिसमें बहुत सी जिम्मेदारी भी शामिल होती है , प्रतिष्ठा, परिवार का मान-सम्मान, खुशी -गम , सब कुछ पति-पत्नी को मिलकर ही निभाना बहुत जरुरी होता है। 

                         अब अगर बात की जाए अपने बच्चों की तब इस बात को यकींनन पुख्ता आधार मिलता है कि बच्चों की बेहतर परवरिश में दोनों का होना बेहद जरुरी है क्यूँकि बच्चों को जहाँ प्यार की ,उचित देखभाल की जरुरत है वहीं दुनिया से कैसे संबंध  बनाने हैं या कैसे लोगों के साथ खुद को आगे बढ़ाना है , इस बात को parents मिलकर बच्चों को सिखाते हैं। 

                               यहाँ पर एक बात कहना जरूरी है दोस्तों और वो यह कि आजकल यह भी देखा जा रहा है कि single parent यानि किसी भी वज़ह से अगर माता -पिता साथ ना हों तब भी mother /father बच्चों की परवरिश बहुत अच्छी तरह करते हैं , 21st century में educated parents और बच्चें भी बहुत अच्छी तरह एक -दूसरे को help or motivate करते हैं।

                             

            पति पत्नी एक सुन्दर जीवन की कल्पना तभी कर सकते हैं जब दोनों अपने रिश्तों में वफ़ादार हों , परस्पर प्रेम रखते हों। एक सफल युगल / दम्पति वही होता है जो आपस में समझदारी , कुशलता रखता हो। 

        " शायद इस बात को आपने भी सुना हो कि :-

 

                           " पति और पत्नी के रिश्ते में

                                मैं और तुम नहीं होते ,

                          दोनों मिलकर हम हो जातें हैं "

 

 

पति पत्नी के लिये , कुछ सावधानियां भी जरुरी है:-

 

                         "चाणक्य नीति"

 

             व्यक्ति को अपनी ही पत्नी से  

                 संतोष कर लेना चाहिये,

       चाहे वह रुपवती हो अथवा साधारण ,

          वह सुशिक्षित हो अथवा निरक्षर 

          उसकी पत्नी है, यही बड़ी बात है। 

 

          दोस्तों, जीवन वहीं खुशहाल , समर्पित,  सुरक्षित और व्यवसित है जहां "दो जिस्म  एक जान" वाली पति-पत्नी में समझ है। 

 

             👫  हमेशा कोशिश करें कि पति -पत्नी के बीच किसी तीसरे इन्सान की वज़ह से कोई कड़वाहट या गलतफहमी न हो अगर हो भी जाए तो आपस में बात करके अपने सम्बन्ध वापिस मज़बूत बनाये क्यूँकि कुछ लोग कभी -कभी परिवार की खुशहाली को देखकर पति पत्नी को गलत सलाह भी दे देतें हैं जिससे आपस में दूरियां हो जाती हैं।👫     

 

                  👫यकीन रखिये आपसे बढ़कर आप दोनों का , आपके परिवार का शुभचिन्तक कोई और नहीं हो सकता। 

 

                           💖😂 😂💖   

 

                                    🙏



 

 



 


 

 

 

 

 

 

 

 



HOW TO PREPARE FOR EXAMS / PARIKSHA KI TAIYARI KAISE KAREN?{IN HINDI}

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