Tuesday, September 28, 2021

BEST FRIEND / ACCHE DOST KI PEHCHAAN KAISE KAREN?

                    BEST FRIEND

           अच्छे दोस्त की पहचान कैसे करें ? 

 

                    जब हम जन्म लेते हैं, उस वक्त से हम सबके जीवन में जो हमारे नज़दीक होते हैं , वो होते हैं हमारे माता - पिता और परिवार के बाकी सदस्य। यह लोग हमारी परवरिश बहुत प्यार और जरूरतों को पूरा करके करते हैं। जैसे -जैसे हम लोग बड़े होते हैं तब लगता है कि हमारी दुनिया तो बहुत बड़ी है। 

                   आप सब याद कीजिये उस वक़्त को जब आप पहली बार स्कूल गए। अगर आप खुद के बारे में भूल गये हैं तो याद कीजिये अपने बच्चे का स्कूल का पहला दिन। 

           अक्सर बच्चे जब पहली बार अपने माता - पिता से दूर होते हैं तो डरते हैं कि अंजान लोग पता नहीं कैसे होंगे लेकिन धीरे - धीरे हम सबका डर खत्म होने लगता है और फिर शुरु होता है वो सिलसिला , जिसे कहते हैं दोस्ती। 

 

       अच्छे दोस्त की पहचान कैसे करें ?

                      😄😇😊


                   बचपन से ही हम सब स्कूल में सीख जाते हैं कि यह हमारा अच्छा दोस्त है या नहीं। वो क्या होता है जो हम एक अनजान को अपना मानना शुरु कर देते हैं। कई बार हमने देखा है कि बचपन का दोस्त ताउम्र हमारा सबसे अच्छा दोस्त बना रहता है , बहुत बार लड़ाई -झगड़े के , MISUNDERSTANDINGS के बाद भी हम उसी दोस्त के साथ खुश रहते है। 


                 अच्छे दोस्तों की पहचान एक दिन में नहीं होती , बहुत बार साथ रहते हुए जब किसी एक को help की जरूरत होती है तब दूसरा जब निःस्वार्थ मदद करता है तब दिल में उस इंसान के लिये एक जगह बन जाती है। 

                 

                  तब क्या ये माना जाए कि क्या जरुरत ही दोस्ती है तो इसका जवाब हाँ भी हो सकता है , आप सोचकर देखो क्या आपको अपने दोस्त की जरुरत नहीं होती। 


                     अब ऐसा भी जरुरी नहीं है कि आपको हर वक़्त कोई काम ही हो तब ही उसे याद करतें हों। काम के वक़्त , जरुरत के वक़्त कितने लोग हैं जो हमारी help करते हैं , कई तो दूर से सुनकर ही भाग जाते हैं कि कहीं हमें ना बोल दे। 


                  अच्छा दोस्त हमारे साथ खड़ा रहता है , सुख में भी और दुःख में भी बशर्त कि हम भी उसे प्यार करते हों उसके वक़्त उसका भी साथ देते हों। 

 

             अच्छे दोस्त की बहुत बड़ी पहचान यह है दोस्तों, कि वो अपने दोस्त को कभी किसी के सामने झुकने नहीं देता। 

                   

             अगर दोस्त गलत रास्ते पर जा रहा हो , तो चाहे उसको अपने दोस्त की गाली , मार भी सहनी पड़े , बुरा - भला सुनना पड़े तब भी वो उसे रोकता तो जरुर है। 


              हर जगह चाहे स्कूल ,कॉलेज या ऑफिस हो तकरीबन हर इंसान अपने दोस्त के साथ अपनी खुशी,अपने ग़म,अपनी मस्ती,सबकुछ 

बांटना चाहता हैं। 

 

       दोस्तों , ऐसा कोई भी इंसान जो आपकी परवाह करें , आपको खुश देखना चाहे , आपकी हेल्प करें , बिना आपके कहे आपकी problem को समझ जाए , आपके लिये, आपके दुश्मनों को बिना आपके , आपके तरफ से ज़वाब दे आए , तब आप समझ जाए कि ऐसा इंसान ही आपका अच्छा दोस्त बन सकता है। 

 

                     😇😊🙏😄😂


 


  

WHAT IS FRIENDSHIP/ DOSTI KYA HAI

                                         WHAT IS FRIENDSHIP

                         दोस्ती / मित्रता क्या है?


                         मित्र / दोस्त , वो शब्द जिसे बोलते ही सबके चेहरे पर खुशी छा जाती है। अगर मैं आपसे ही कहूँ क्या आपकी भी दोस्ती है किसे से ? क्या आपका कोई दोस्त / मित्र है ? तब मुझे पूरा यकीन है कि आपके होठों पर मुस्कान और आंखों में एक चमक आ जाएगी। 


                           कभी भी किसी को यह बताना नहीं पड़ता कि मित्रता क्या है , लेकिन दोस्तों इस नाजुक रिश्ते को बहुत संभाल कर रखना पड़ता है। 


                           FRIENDSHIP एक अहसास है जो बिना इस बात की परवाह किए बनता है कि आप क्या हैं? आपका STATUS / पहचान / रुतबा क्या है ? 


                         FRIENDSHIP / दोस्ती के मायने भी यही है कि दोस्ती दिल का रिश्ता है , यह ना तो उम्र से जुड़ा है , ना इस बात से कि अमीर या गरीब , ना ही दोस्ती जात - पात देखती है अगर दोस्ती कुछ देखती है तो वो है, दिल का सुकून जो दोस्त से मिलकर हर इंसान को अपने बचपन की ओर , अपनी मासूमियत की ओर ले जाता है। 

 

                          इन्सान बहुत सारी बातें अपने दिल में ही छुपाकर रखता है , हर इंसान की ज़िन्दगी में कभी -कभी कुछ दर्द , अकेलापन , खुद की कुछ कमियाँ , कुछ भी ऐसा होता ही है जिसे वो सबसे नहीं कह पाता, यहाँ तक कि अपने परिवार के लोगों से भी नहीं लेकिन उन्हीं दिल की बातों को वो अपनी दोस्ती में , FRIENDSHIP में , अपने दोस्तों से या किसी एक दोस्त से बहुत आसानी से कह जाता है और सब कुछ बता कर जब वो अपने दोस्त से कहता है कि"अबबताक्याकरूँ" और तब दोस्त का यह कहना कि "मैं हूँ ना", दोस्ती की जीती - जागती मिसाल है।           

 

                       आजकल दोस्ती सिर्फ किसी एक दो लोगों के बीच ही नहीं है इसमें भी बहुत विस्तार हो गया है।

                    आज का दौर technology का है , INTERNET की वजह से लोग सिर्फ अपने देश में ही नहीं , सात -समुन्दर पार यानि विदेश में बैठे अपने दोस्त से CONNECT रहते हैं। 

                    

                    दोस्तों , 21st century / २१वीं सदी में life / जीवन जहाँ काफी आसान हो गया है वही लाइफ में परेशानियां भी बहुत हैं , ऐसे में दिल सुकून के , फुर्सत के कुछ लम्हें चाहता है और इन्हीं लम्हों में दोस्त की दोस्ती जीवन को खुशी , मुस्कुराहट , मस्ती देती है।       

           

                 दोस्ती का मतलब सिर्फ साथ में मौज - मस्ती ही नहीं होता , एक -दूसरे की जरुरत , परेशानी का ध्यान रखना भी होता है। 


                दोस्तों दोस्ती करो तो निभाओ भी , वरना सड़क पर चलने वाला हर शख़्स  / इंसान दोस्त नहीं होता। 


                               🙏😊🙏

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