Wednesday, June 16, 2021

RELATIONSHIP SERIES: RELATIONSHIP BETWEEN DAUGHTER AND FATHER

                "RELATIONSHIP BETWEEN 

                     FATHER & DAUGHTER"

 

                          विश्व / WORLD / संसार का हर इन्सान अपने 

सम्बन्धों की कद्र करना जानता है क्यूँकि हर वो शख़्स / person जो 

अपने आप की value जानता है उसे एक बात अच्छी तरह से पता है 

कि अगर अपने जीवन को पूर्णता से जीना है तो जिन्दगी में हर रंग 

होना चाहिये और इन्हीं खूबसूरत रंगों में सबसे शोख़ और चटक रंग

से चमकता है हमारा परिवार। 

 

                                     परिवार के साथ केवल सुख ही नहीं होता , 

कभी - कभी दुःख भी आते हैं जिसको पूरा परिवार मिलजुलकर दूर 

कर लेता है। 

 

   परिवार में एक ऐसा रिश्ता है जो बहुत कोमल ,मासूम और नाज़ुक 

सा होता है जिसकी भोली सी मुस्कान , जो खिलखिलाती, हँसते हुए ,

सारे परिवार को अपना बना लेती है , वो हैं हम सबकी प्यारी चहेती 

                                  😄😃😂😁😀😇

                                "बेटियाँ / DAUGHTER"

 

                         एक पिता / FATHER के लिये उस की बेटी किसी 

परी से कम नहीं होती। किसी भी पिता की "आँखों का तारा" और 

"पिता का अभिमान " होती है उसकी बेटी। 


                      आज 21 st century / सदी में , पिता और पुत्री के 

सम्बन्धों को बेहतर ढंग से समझना बहुत जरुरी हो गया है। बदलती 

परिस्थितियां , भागती -दौड़ती ज़िन्दगी , परिस्पर्धा , नित नए  

 आविष्कार / technology, बहुमुखी क्षेत्रों में विकास ,इन सबको एक 

पिता को जानना - समझना इसलिये और भी जरुरी है क्यूँकि आज 

अगर अपनी बेटी को highly educated , पढ़ा -लिखा शख़्स बनाना 

है तो पहले अपने आपको, इस बदलती परिस्थिति को समझना होगा। 

 

                      कोई भी रिश्ता हो , हर इन्सान प्यार और सम्मान के 

साथ अपने जीवन को जीने के लिये दूसरे व्यक्ति की मदद भी चाहता 

है और अगर बात बेटियों की हो , तब तो बेटियां अपने जीवन के हर 

फ़ैसले को अपनी मर्ज़ी से नहीं लेती हैं।  

                

                                बेटी अपनी माँ से अपनी इच्छा बताती है और 

फिर माँ पिता को बताती है कि बेटी क्या करना चाहती है फिर सही -

गलत की मोहर लगती है, permission मिली तो सही और अगर नहीं 

मिली तो बेटी को  अपने  "क्यूँ नहीं " का जवाब नहीं मिलता। 


                      "21st CENTURY  / 21वीं सदी "  


                 "ROLE  OF FATHER :: पिता की भूमिका" 

 

         हर पिता अपनी बेटी से बहुत प्यार करता है और हमेशा यही 

चाहता है कि उसकी बेटी सुख से रहे,उसे कोई कमी न महसूस हो 

अपने -अपने सामर्थ्य के अनुसार हर पिता बेटी की उचित देखभाल 

करता रहा है।

                 "अब देखभाल के नज़रिये में फ़र्क लाइये।"

 

                          बदलती परिस्थितयों और कड़े संघर्षों को देखते हुए 

अपनी बेटी के साथ  "MENTOR" यानि "गुरु "की भूमिका निभाइये। 

अब वक़्त बहुत challenging or demanding है इसलिये अपनी 

बेटी को बचपन से ही होशियार बनाइये , हर skill सिखाई जाए। 

              

                                           बेटी जब बड़ी होती है तो अक्सर 

parents / माता -पिता उसकी शादी / marriage के लिये लाखों का 

ख़र्च कर देते हैं लेकिन जब बेटी की high - education यानि उच्च - 

शिक्षा की बात होती है तो अक्सर लोग मना कर देते हैं। आजकल यह 

कहा जाने लगा है कि "इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि विवाह

 सफल होगा परन्तु इस बात की पूरी गारंटी है कि शिक्षा से जीवन 

सफल होगा ही होगा।"


               एक पिता होने के नाते अगर आप समझदारी से बेटी का साथ देते हैं तो यकीन मानिये "पिता -पुत्री का यह सम्बन्ध बहुत खूबसूरत,  विश्वास और प्यार से भरा होगा।" 

 

                         "21ST CENTURY / 21 वीं सदी " 

 

               "ROLE OF DAUGHTER :: बेटी की भूमिका "

 

                         जीवन में किसी भी बेटी को अपने माता -पिता का 

प्यार -दुलार , उचित देखभाल और जीवन के संघर्षों में अगर उनका 

साथ मिल जाए तो खुद पर नाज़ करना चाहिये। 

 

               "अब जीवन जीने के नज़रिये में फ़र्क लाइये " 

 

                          बेटी को भी अपने जीवन के challenges, संघर्षों 

को समझना चाहिये। 21st century में आप एक उच्च - कोटि के 

technology / तकनीकी युग में जी रहीं हैं , जहाँ आप हर नॉलेज से 

ख़ुद को update रख कर अपने आप को उच्च मुकाम पर पहुंचा 

सकतीं हैं। 

                         

                 अगर आपको आपके पिता अपना पूरा सहयोग देते हैं तो 

उनका पूरा सहयोग लें और स्कूल से लेकर कॉलेज की शिक्षा कोअच्छे 

अंकों से पास करें। education के साथ ही साथ हो सके तो कोई ना 

कोई technical / तकनीकी ज्ञान /knowledge भी जरूर लें जिससे 

आपको नौकरी मिलने में आसानी हो और आप उच्च स्थान हासिल 

करके अपना और अपने माता - पिता का मान बढ़ाये। 


                  पिता को बेटी अगर कोई उपहार देना चाहती है तो वह 

यही हो सकता है कि आप समाज में अपना एक सफल जीवन , उच्च 

मुकाम बनाये।  अपने पिता के साथ बेटी की इससे जायदा खूबसूरत 

bonding / सम्बन्ध और कुछ नहीं हो सकता। 

 

                                       😊🙏😊




 






     

 

                                                

Tuesday, June 1, 2021

RELATION BETWEEN HUSBAND AND WIFE : PATI PATNI KA SAMBANDH KAISA HO?

"RELATION BETWEEN HUSBAND N WIFE"

 

             सृष्टि के निर्माता की सबसे खूबसूरत रचना स्त्री और पुरुष , 

जिनके संगम से निर्माण होता है जीवन का। जिस दो इन्सान को 

भगवान ने जीवन का निर्माण करने का निमित्त बनाया है , उन दोनों का

 आपसी रिश्ता भी बहुत सुन्दर और प्यार भरा होना ही चाहिए। 

 

क्यों ज़रुरी है पति पत्नी के रिश्ते में सामंजस्य :-

 

         पति पत्नी का रिश्ता वो रिश्ता है जो सृष्टि में सबसे पहले आता है इसके बाद यही रिश्ता माता-पिता की भूमिका में बदल जाता है और सम्मान की दॄष्टि से देखा जाता है। जब बात होती है आपसी सम्बन्ध की तब इस रिश्ते से यही उम्मीद होती है कि पति -पत्नी का आपसी सम्बन्ध बहुत मज़बूत हो जिससे दोनों मिलकर अपने जीवन में आनेवाले हर संबंध और विभिन्न तरह के संघर्षों का मिलकर सामना कर सकें। इन दोनों के आपसी समान विचार , आपसी प्रेम , आपसी विश्वास ही गृहस्थी की नौका को सही दिशा दे सकेंगे। 

                              पति पत्नी का रिश्ता मज़बूत और सामंजस्य वाला इसलिये भी होना ज़रुरी है क्यूँकि इंसान एक सामाजिक प्राणी माना जाता है और इसी बात को ध्यान में रखकर पति पत्नी को आपसी प्रेम और विश्वास की नींव को बहुत मज़बूत रखना चाहिये। 

                          पति पत्नी के रिश्ते को परिवार के बाकी रिश्तों को भी निभाना होता है जिसमें बहुत सी जिम्मेदारी भी शामिल होती है , प्रतिष्ठा, परिवार का मान-सम्मान, खुशी -गम , सब कुछ पति-पत्नी को मिलकर ही निभाना बहुत जरुरी होता है। 

                         अब अगर बात की जाए अपने बच्चों की तब इस बात को यकींनन पुख्ता आधार मिलता है कि बच्चों की बेहतर परवरिश में दोनों का होना बेहद जरुरी है क्यूँकि बच्चों को जहाँ प्यार की ,उचित देखभाल की जरुरत है वहीं दुनिया से कैसे संबंध  बनाने हैं या कैसे लोगों के साथ खुद को आगे बढ़ाना है , इस बात को parents मिलकर बच्चों को सिखाते हैं। 

                               यहाँ पर एक बात कहना जरूरी है दोस्तों और वो यह कि आजकल यह भी देखा जा रहा है कि single parent यानि किसी भी वज़ह से अगर माता -पिता साथ ना हों तब भी mother /father बच्चों की परवरिश बहुत अच्छी तरह करते हैं , 21st century में educated parents और बच्चें भी बहुत अच्छी तरह एक -दूसरे को help or motivate करते हैं।

                             

            पति पत्नी एक सुन्दर जीवन की कल्पना तभी कर सकते हैं जब दोनों अपने रिश्तों में वफ़ादार हों , परस्पर प्रेम रखते हों। एक सफल युगल / दम्पति वही होता है जो आपस में समझदारी , कुशलता रखता हो। 

        " शायद इस बात को आपने भी सुना हो कि :-

 

                           " पति और पत्नी के रिश्ते में

                                मैं और तुम नहीं होते ,

                          दोनों मिलकर हम हो जातें हैं "

 

 

पति पत्नी के लिये , कुछ सावधानियां भी जरुरी है:-

 

                         "चाणक्य नीति"

 

             व्यक्ति को अपनी ही पत्नी से  

                 संतोष कर लेना चाहिये,

       चाहे वह रुपवती हो अथवा साधारण ,

          वह सुशिक्षित हो अथवा निरक्षर 

          उसकी पत्नी है, यही बड़ी बात है। 

 

          दोस्तों, जीवन वहीं खुशहाल , समर्पित,  सुरक्षित और व्यवसित है जहां "दो जिस्म  एक जान" वाली पति-पत्नी में समझ है। 

 

             👫  हमेशा कोशिश करें कि पति -पत्नी के बीच किसी तीसरे इन्सान की वज़ह से कोई कड़वाहट या गलतफहमी न हो अगर हो भी जाए तो आपस में बात करके अपने सम्बन्ध वापिस मज़बूत बनाये क्यूँकि कुछ लोग कभी -कभी परिवार की खुशहाली को देखकर पति पत्नी को गलत सलाह भी दे देतें हैं जिससे आपस में दूरियां हो जाती हैं।👫     

 

                  👫यकीन रखिये आपसे बढ़कर आप दोनों का , आपके परिवार का शुभचिन्तक कोई और नहीं हो सकता। 

 

                           💖😂 😂💖   

 

                                    🙏



 

 



 


 

 

 

 

 

 

 

 



Thursday, May 27, 2021

RELATIONSHIP SERIES: SAMBANDH SHRRNKHALA

         RELATIONSHIP SERIES : सम्बन्ध श्रृंखला

 

  RELATIONSHIP SERIES / सम्बन्ध श्रृंखला क्या है ?

 

                 हम इन्सान अक्सर रोटी कपड़ा और मकान को सबसे पहली जरूरत मानते हैं जो शायद सही भी है लेकिन किसके लिये चाहिये यह सब ? क्या सिर्फ़ खुद के लिये ? 

       जी नहीं , यह सब जरूरी होता है खुद के साथ -साथ अपने परिवार के लिये भी। 

           इंसान जन्म लेने के साथ ही बंध जाता है ऐसे कुछ सम्बन्धों से जो उसके खून के रिश्ते कहलाते हैं। जिनको हम BLOOD RELATIONS भी कहते हैं। 

 

       बढ़ती उम्र के साथ -साथ कुछ रिश्ते और भी बनते हैं जिनमें  दोस्ती, इंसानियत,और हमसफ़र के रिश्तें भी होते हैं। 

     

      हर रिश्ता बहुत खास और नाज़ुक होता है दोस्तों, हर रिश्ते की ख़ासियत उस इंसान से होती है जिसके साथ हम अपना सम्बन्ध रखते हैं। लेकिन सभी सम्बन्धों के लिये कुछ ऐसी बातें भी हैं जिनको हमें ध्यान में रखना भी बहुत जरूरी है। 

       

      21st century यानि 21वीं सदी में रिश्तों में भी बहुत से बदलाव हुए हैं जिसका असर अच्छा भी है और कहीं कहीं बुरा भी। 


                       दोस्तों, अगले ब्लॉग्स में आप के लिये बहुत से सम्बन्धों के बारे में ज़िक्र होगा। 


        दोस्तों, किसी ने क्या खूब कहा है :-

             

                    "रिश्ता जो भी हो 

                  मज़बूत होना चाहिये 

                       मज़बूर नहीं"


                         😇🙏😊


 

           

Wednesday, April 28, 2021

RELATIONSHIP /RESHTE

                          RELATIONSHIP------रिश्ते / सम्बन्ध

 

                           संसार में जन्म लेने के साथ ही हर इन्सान रिश्तों में बंध जाता है। सबसे पहले जो रिश्ते बंध जाते हैं वो खून के रिश्ते होते हैं जिन्हें हम Blood Relation भी कहते हैं। यह वो रिश्ते होते हैं जो हमारी आख़िरी सांस तक हमारे साथ चलते हैं जिससे हमारा एक परिवार बनता है।  

          दोस्तों , जैसे -जैसे उम्र बढ़ती जाती है वैसे -वैसे इन्सान दूसरे लोगों के साथ अपने अलग -अलग तरह के सम्बन्ध बनाता जाता है , जो हर इंसान के जीवन में अपना अलग महत्व रखते हैं। 

 

                                        कुछ लोग 

                                  किस्मत की तरह 

                                        होते हैं

                               जो दुआ से मिलते हैं,

                                  और कुछ लोग 

                             दुआ की तरह होते हैं

                          जो किस्मत बदल देते हैं !


                                        हम सबकी ज़िन्दगी में उन सम्बन्धों की बहुत अहमियत होती है जो हमारे खून के रिश्ते होते हैं यानि हमारे blood relations जिसमें हमारे माता-पिता , भाई - बहन आते हैं। यकीनन यह वो रिश्ते हैं जो हमें हमारी किस्मत से मिले हैं। यही रिश्ते बचपन से लेकर जवानी तक और इसके बाद हमारे बुढ़ापे / वृद्धावस्था तक साथ रहते हैं। 


                   इसके साथ - साथ हम अपने जीवन के हर पड़ाव में, अपने सम्बन्ध उन लोगों के साथ भी बनाते हैं जो हमारे जीवन में हमें मिलते हैं जैसे हमारे दोस्त , ऑफिस में साथ काम करने वाले , हमारे जीवन में आनेवाला हर वो शख्स , जो किसी न किसी रूप में हमारी ज़िन्दगी से जुड़ा है।

 

relationship / सम्बन्धों की जब बात होती है तब यह चंद लाइन जरूर ध्यान में रखें -----------

                            

                  दुनिया के लिए तुम केवल एक इंसान हो ,

             लेकिन एक इंसान के लिए तुम पूरी दुनिया हो !

 

दोस्तों , सम्बन्ध / रिश्ते - नाते सहेज कर रखना आसान नहीं है क्यूँकि बहुत ईमानदारी और प्रेम से अपने रिश्तों को समय - समय पर यह अहसास करवाना होता है कि " मैं हूँ ना "😄


👪👫👬👭👧👦👥😀😁😂😌😊😉😇😏😒😕😖😘😗😍😎💟💔💓💖💘💋

   RELATIONSHIP / सम्बन्ध   "समुंदर है भावनाओं का"

 

                        हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि आप किस सम्बन्ध में हैं और अपने कितने दायरे में हैं। 

 

          एक उम्दा रिश्ता वही है जहाँ सूझ - बुझ , दुनियादारी , परिवार , दोस्ती , प्रेम , ज़िम्मेदारी सब कुछ आपस में मिलकर निभाया जाए। 

                                            💕😊💖 



 

                            

Monday, March 15, 2021

GENERATION GAP : PEDHI KA ANTER

                       GENERATION GAP :: पीढ़ी का अंतर 

 

                             दोस्तों, आज हम जिस विषय / टॉपिक पर बात कर रहे हैं , यह टॉपिक

 हर उम्र के लोगों के लिये नया भी हो सकता है और पुराना भी। यह विषय इतना संजीदा है कि 

इस पर बात करना भी कभी - कभी समस्या लगता है क्यूँकि दोनों ही GENERATIONS / 

पीढ़ीओं को लगता है कि वो ही सही है। 

                   

                          दोनों GENERATIONS यानि के हर दौर के माता- पिता  और उनके बच्चे। 

 

                        कितनी ही शताब्दियाँ बदल गई , लोगों ने हर बदलती Century / शताब्दी देखी 

लेकिन Generation gap आज तक नहीं बदला। आज भी माता  पिता / बेटा - बेटी के बीच में 

यह समस्या देखने को मिल रही है। 


                           एक वक़्त वो था दोस्तों , जब सभ्यता विकसित अवस्था में थी। इन्सान की 

तुलना बन्दरों से की जाती रही है , सभ्यता के विकास के साथ - साथ इन्सान भी विकसित 

हुआ। बंदरों की तरह रहता था इंसान फिर पत्थर से आग निकली तब और विकास हुआ। 

फिर धीरे - धीरे न जाने कितने विकास हुए और आधुनिक  युग शुरू हुआ 

                            

            "ऐसा माना जाने लगा की इन्सान ने अपनी बुद्धि के बल पर सफलता पायी है।"

 

"अब एक सवाल हम सबको खुद से करना चाहिये कि क्या हमारी बुद्धि की क्षमता इतनी कम हो गई है कि पीढ़ी दर पीढ़ी सबको सिर्फ़ और सिर्फ़ अन्तर ही नज़र आ रहा है , क्यूँ नहीं समझ रहे उन सवालों को जिसका उत्तर /answer हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को देना होगा।"

 

             "WHAT IS GENERATION GAP"

 

कुछ रोचक बातें ::::

 

        GENERATION GAP :-

 

           FATHER used to walk 20 

           minutes to save 20 rupees,

 

           SON spends 20 rupees 

           to save 20 minutes .

 

 👀👀👀👀👀👦👧👪👫💦😕😔😓😖

 

               दोस्तों , जब भी GENERATION GAP / पीढ़ी के अंतर की बात होती है तब यह हर परिवार का आपसी कलह होता है। अगर आप समझदारी से देखेंगे तो आप अपने पिता ,माता ,बेटे ,बेटी को समझ पायेंगे। 

                         अगर आप सही हैं तो कोई एक अपनी बात को पूरे विस्तार से दूसरे को समझाय , कई बार कोई बात ऐसी होती है जो परिवार की प्रतिष्ठा , संस्कारों से भी जुड़ी होती है ,या फिर बहुत बड़े आर्थिक मसले से जिससे पैसों की परेशानी या कर्ज़ जुड़ सकता है। 

बहुत सारी ऐसी बातें जिनको पुरानी पीढ़ी नहीं मानती लेकिन नई पीढ़ी के लिये कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। 

 

                       ऊपर जो उदाहरण दिया गया है :- FATHER , SON 

का , अपने आप में ही पूरी कहानी कह देता है। 


                 "मेरा तो मानना है दोस्तों , पिता या माँ के अनुभवों को 

हलके में नहीं लेना चाहिये ,  उनके जीवन में भी SAME /एकसमान 

परेशानी आई होगी , हो सकता है उस वक़्त वो बात सही रही हो ,अब 

अगर आपको जिस वज़ह से सही नहीं लग रही , आप धर्यै से उनकी 

बात को सुनकर अपना पक्ष रखें। 


"फिर भी अगर दोनों को लगे कि मैं ही सही हूँ तो अपने आप को दूसरे 

 की जगह पर रख कर सोचें "



दोस्तों , ज़िन्दगी कब तक मिली है पता नहीं , आख़िर हैं तो अपने वंश , 

अपने ही माता - पिता,  " फिर टकराव , तक़रार क्योँ ?"


  अनुभव और नव आविष्कार को साथ लेकर चलें। 

 

               GENERATION GAP / पीढ़ी के अंतर को

 सिर्फ़ और सिर्फ़ इसी तरह समाप्त किया जा सकता 

है।

 💖💖💖💖😇😇😇😇😇😇💖💖💖💖

 

 

 

 



 

 

 

 

 



 

                         

 

                           

Saturday, February 27, 2021

LOSS OF MULTITASKING / MULTITASKING KE NUKSAAN

          MULTITASKING KE NUKSAAN

                LOSS OF MULTITASKING 

 

               MULTITASKING : एक साथ कई कार्य करना  

 

 आपने हमेशा यही सुना और देखा होगा कि हम सब और बाकी लोग किसी भी काम को करते हैं तो कोई एक ही काम होता है और उसी एक काम को करने में हम अपना पूरा ध्यान लगा देते हैं और इस बात का ध्यान भी रखते हैं कि हमारा काम तत्परता से और सही तरह से पूरा हो जाए। 

           अब बात चाहे हमारे रोज़गार की हो या फिर अन्य किसी भी क्षेत्र की। 

 

हमेशा से यही माना जाता रहा है कि कोई भी क्षेत्र हो , कोई भी विधा हो अगर उसमें पारंगत होना है तो अपने पूरे मनोयोग से उस क्षेत्र में काम करना होगा। बचपन से घर और स्कूल , अपने सगे - सम्बन्धी , दोस्त यही सलाह देते रहे। हम सब भी इसी नियम पर चलते रहे।  

                    

            दोस्तों, पिछले कुछ वर्षों से एक बात सुनने और देखने में आई कि अब 21 st century में एक ही काम से , जीवन नहीं चलने वाला क्यूंकि नए -नए आविष्कार हुए जिससे जन - जीवन में जागृति / उत्सुकता आई। इसी से नए रोज़गार , शिक्षा , रिसर्च आदि में भी प्रगति हुई। 

 

                            हर इन्सान सोचने पर मज़बूर हो गया कि क्या वो स्वयं इतना क़ाबिल है कि वो भी मल्टीटास्कर बन सके?

 

बेशक अच्छा विचार हो सकता है लेकिन तब जब आप स्वयं क़ाबिल हों।  कई बार देखा गया है दोस्तों , लोग दूसरों की नकल बहुत करते हैं उनको लगता है कि अगर सामने वाला कई काम एक साथ करके सफल हो रहा है तो मै भी ऐसा करके सफल हो सकता हूँ। 

                            

                        हम आपको एक सलाह देना चाहेंगे और वो यह कि अगर आप अपने बारे में पूरी तरह से इस बात का यकीन रखते हैं कि आप दिन के 12 से 16 घंटों तक लगातार काम कर सकतें हैं तभी मल्टीटास्कर बनने के बारे में सोचिये। मल्टीटास्कर सुनने या किसी को देखने में जितना आसान लगता है उतना है नहीं क्यूँकि बहुत सारे काम बहुत सारी मेहनत , भागदौड़ , नाकामी वाले भी हो सकते हैं जिनकी वज़ह से तनाव भी हो जाता है जिससे रोज़मर्रा की personal life भी disturb हो जाती है। 

 

आइये जानते है मल्टीटास्कर के नुक्सान के बारे में :-

                                                         

1 . अनुभवहीनता :-  अगर आप किसी काम को करने में सक्षम नहीं हैं या कम knowledge / ज्ञान रखते हैं तब आपका काम आपके लिये सिरदर्द बन सकता है जिससे सम्बन्धित क्षेत्र में आप पर अनुभवहीन का टैग लग सकता है जिससे आप तनाव की स्थिति में रह सकते हैं। 

 

2.  योजनाविहीन :-  अगर आप मल्टीटास्कर बनना चाहते हैं और आपने अपने सभी कार्य को करने की कोई प्लानिंग नहीं की तब आप हर काम में उलझनें महसूस कर सकते हैं। 

 

3.  समय -प्रबन्धन के बिना :- अगर आप अपने मल्टीटास्क बिना समय प्रबन्धन के करते हैं तो किस काम को कितने समय में करना है,  आप निश्चित नहीं कर पाएंगे जिससे अगले काम में देर हो सकती है या हो सकता है कि उसी दिन आप अपने काम को पूरा ना कर पायें। 

 

4. वित्तीय -प्रबन्धन के बिना :- मल्टीटास्कर बनने के लिये finance security बहुत आवश्यक है।  बिना वित्तीय -प्रबन्धन आप कई कामों में असफल हो सकते हैं। 

 

5. व्यक्तिगत जीवन :-  बिना उपरोक्त योजनाओं के मल्टीटास्कर बनना बहुत ही मुश्किल है।  अगर आप हर काम बिना योजना के करेंगे तो आपकी दिन प्रतिदिन की परेशानी हो सकता है कि आपकी ज़िन्दगी में आपके व्यक्तिगत जीवन में भी अस्थिरता ले आए। 

 

                                 दोस्तों , मल्टीटास्कर बनने का ख़्वाब देखिये लेकिन इसके नुकसान को भी ध्यान में रखें।

 

 

 

 



 

 

 

 

Wednesday, January 27, 2021

BENEFITS OF MULTITASKER /MULTITASKER KE PHYDE KYA HAIN?

 BENEFITS OF MULTITASKER/MULTITASKING

                       MULTITASKER के लाभ 

                    मल्टीटास्कर के फायदे क्या हैं ?


                                       हम सब बचपन से एक ही बात सुनते आए हैं कि पढ़ोगे- लिखोगे बनोगे नवाब , खेलोगे - कूदोगे होगे खराब। 

                                         

                            एक और बात जो हर बच्चे और जवान ने अपने अंतर्मन में पूरी तरह समा ली कि एक वक़्त में सिर्फ़ एक ही काम करना है। 


" दोस्तों , क्या आज 21st century में ऊपर लिखी बातों का कोई वज़ूद रह गया है ?"


                       अब हो सकता है कि आप में से कुछ लोग यह कहे कि यह बात तो बिलकुल सही है ? 

 

       अगर यह बातें सही हैं तो "आप ही लोग उन लोगों के लिये तालियाँ क्युँ बजाते हैं जो एक के बाद एक नया काम करते हैं और सफल होकर,आप ही लोगों से अपने लिये तालियाँ बजवाते हैं ?

                                               या फिर, आपको कभी अपने आफिस में या व्यापार में खुद से आगे निकलने नहीं देते ?

 

                    "इसका कारण जानना चाहते हैं क्या?"

 

सफल लोगों की सफलता का सबसे पहला सबक वो नहीं है जो तमाम उम्र के लिये हम सब ने सीख लिया , उनका सबक था कि हर गलती के बाद , फिर से दूसरा प्रयास और वो भी कई बार , कई तरह से और कई कामों को करते हुए।

 

 

मल्टीटास्कर होने के लाभ :-

                                               जिज्ञासा - जब आप जिज्ञासु होते हैं तब आप कई चीज़ों के बारे में जानना चाहते हैं। यह तब और भी जरुरी हो जाता है जब आप मल्टीटास्कर बनना चाहते हैं क्यूँकि आपको सफल होने के लिये skill सीखनी पड़ेंगी जो आपके लाभ को बढ़ाएगी। 

 

1 . . efficient / कुशल ::  आज के  समय में किसी के पास इतना 

समय नहीं है कि वो आपसे पूछने आए कि आपको क्या आता है , यह 

आपको अपने multiple / विभिन्न कामों के द्वारा लोगों को बताना या

 दिखाना पड़ेगा। आपकी multi /विभिन्न  काम करने की योग्यता ही

 आपको उच्च मुकाम हासिल करने में लाभ दिलवायगी। 

 

2 . . money/name /fame /पैसा /नाम /शोहरत  :: जब आप 

एक साथ कई काम करते हैं तो ज़ाहिर सी बात है कि लोग आपको 

जानने लगते हैं और आपके निपुणता के साथ किये गए काम को 

सराहना भी मिलती है और लोग आपके नाम को भी आगे बढ़ाते हैं। 


3 . . self satisfaction / आत्म  संतुष्टि  :: आज के  अनिश्चित दौर

 में जब घर - परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है , नौकरी को बचाने के 

लिये तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है , अगर आप अपने 

किये लगभग सभी प्रयासों में सफल होते हैं तो एक दिन निश्चित रुप से 

आप आत्म  संतुष्टि का अनुभव करेंगे। 

 

  



 

                       

 

Thursday, January 14, 2021

HOW TO BE A MULTITASKER ? / MULTITASKAR KAISE BANEY?

                                                   HOW TO BE A MULTITASKER

 

                  "MULTI-TASKER" किसे कहते हैं ? 

                       "कौन होते हैं "मल्टीटास्कर"

                                           अक्सर ऐसे बहुत से सवाल होते हैं जिनको कई बार हम सुनते तो हैं लेकिन इनके जवाब जानने की कभी भी कोशिश नहीं करते। इसका कारण भी शायद यही है कि हम लोग एक वक़्त में केवल एक ही काम करते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें नई बात क्या है ? हर इन्सान एक वक़्त में एक ही तो काम करता है। सही है दोस्तों, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो एक ही वक़्त में कई काम लगातार करते रहते हैं , वो भी एक के बाद एक , कभी - कभी तो साथ - साथ भी। 

                                                यकीन नहीं हो रहा ?

चलिये हम आपकी मुश्किल आसान कर देतें हैं। आपने अपनी लाइफ में कुछ ऐसे नाम तो सुने ही होंगे जो बहुत सारे काम एक साथ करते हैं जैसे :- शाहरुख़ खान, सलमान खान, अमिताभ बच्चन , मुकेश अंबानी और भी ना जाने कितने लोग। 

अब आप सोच रहे होंगे कि इन सबको तो एक साथ सब काम करने ही होते हैं क्यूँकि यह तो बड़े नाम वाले दिग्गज लोग हैं   "CELEBRITY OR BUSSINESSMAN" हैं।

"दोस्तों, तक़दीर से अमीर कम होतें हैं लेकिन मेहनत से अमीर सब हो सकतें हैं।"

                                       ऊपर लिखे नामों पर अगर आप गौर करेंगे तो देखेंगे कि सबने अपने जीवन में मेहनत की है और कड़े संघर्ष और मेहनत के बल पर ही आज वो दौलतमंद और हुनरबाज कहलाए जाते हैं। 

 

                  क्या  मल्टीटास्कर बनना आसान है ?

                                  यह सवाल बहुत कठिन हैं दोस्तों। 

 

अगर आप खुद के लिये इस सवाल का जवाब पाना चाहते हैं तो इसका सटीक और सही जवाब है   "हाँ"

                        लेकिन मल्टीटास्कर बनने के लिये कड़ा संघर्ष भी होगा और अगर आप मेहनत और सही योजना के साथ आगे चलेंगे तो यक़ीनन आप मल्टीटास्कर बन सकते हैं। 

                       

                     कैसे बने मल्टीटास्कर ?

 

{1} TIME-MANAGEMENT :-                                                                            सबसे पहले जो जरुरी काम करना है, वो है

  "समय की कीमत" को समझना। इसके लिये सुबह जल्द से जल्द उठने की आदत डालनी

 चाहिये जिससे हर काम के बीच सही अंतराल हो सके। 

 

{2} PLANNING :-

                            आपको अपनी योजना या planning clear होनी चाहिये यानि

 आपको सुबह से लेकर रात तक अपने काम की एक लिस्ट / list ready / तैयार रखनी होगी 

जिससे आपका समय खराब ना हो। 

 

{3} OVERLOAD :-

                             आप शुरू में कभी भी बहुत सारे काम एक साथ करने 

की कोशिश न करें क्यूँकि कहते हैं कि एक साथ दो नावों में कभी भी सवार नहीं होना 

चाहिये। आप का जो भी पहला और महत्वपूर्ण काम है उसे पहले निपटायें उसके बाद दूसरे 

काम को करें और हो सके तो Time - Management ऐसा रखें जिससे दोनों कामों के बीच 

समय - अंतराल रहे ताकि आप बिना आपाधापी, बिना किसी परेशानी के अपना काम ख़ुशी 

से पूरा कर सकें। 

 

{4} SKILL :- 

                    किसी भी काम को करने से पहले आपको अपनी skills , किसी भी 

काम से संबधित ज्ञान को जरूर से बढ़ाना चाहिये जिससे जब आप अपना काम करने लगे 

तो किसी तरह की परेशानी ना हो। अगर काम करना नहीं आएगा तो आपको दूसरे लोगों से 

मदद लेनी होगी जिससे आपका समय भी खराब होगा और सही समय पर मदद मिलेगी या

 नहीं कुछ कह नहीं सकते। 

 

                                          उम्मीद है आपको मल्टीटास्किंग के बारे में कुछ जानकारी मिल गई होगी। बहुत जरुरी है दोस्तों की आपका vision clear हो ,आप क्या और कैसे करना चाहते है , इस पर आप फोकस रखें। 

 

MULTITASKER OR MULTITASKING के कुछ नुकसान और 

फायदे भी हैं जिसके लिये आप मेरे ब्लॉग के अगले PAGES को देखें। 

                                               😊    

   

 

  

 

 

 


  

                                       

 

 

 

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