Tuesday, September 3, 2024

WORK IS WORSHIP / KAAM PUJA HAI

                                                      WORK IS WORSHIP 

                                            काम पूजा है।   

 

     किसी भी इन्सान का जीवन तीन चरणों में होता है।                                    बचपन , जवानी और बुढ़ापा।  

 

कहते हैं कि बचपन ही वो उम्र है जब आप बेफिक्र होते हो क्यूँकि इसके बाद तो जीवनभर इन्सान की भाग - दौड़ खत्म ही नहीं होती।  

सही भी है बचपन के सुनहरे दिन , मस्ती , वो हिस्सा है जीवन का जिसका जिक्र हमेशा होता है। 

जैसे -जैसे बचपन के बाद युवावस्था आती है तब दौर शुरु होता है सीखने का, काम करने का। पता ही नहीं चलता कि कब उम्र आगे बढ़ती गई और काम करते करते जीवन का वो दौर आ गया जिसे बुढ़ापा कहते हैं। 

अक्सर सुना जाता है कि "WORK IS WORSHIP " यानि 

                                      "काम ही पूजा है। " 

 

क्या कभी आपने काम और पूजा में फ़र्क करके यह समझने की कोशिश की है कि काम / WORK को WORSHIP / पूजा क्यूँ कहा गया है ? 

 

आप जो भी काम करते हों अगर उसमें आपकी पूरी लगन और कोशिश शामिल ना हो तो क्या आप अपने जीवन में उतने सफल हो सकते हैं जितने में आपको सफल व्यक्ति माना जा सके ?

काम को अगर आप अपनी पूजा मानते हैं तो यक़ीनन आप दिल से चाहते होंगे कि मेरा हर काम सही से हो , कोई गलती ना हो ,मुझे अपने काम में कामयाबी मिले।   

                क्यूँ कहा जाता है कि WORK IS WORSHIP ? 

इस बात को समझना चाहते हैं तो उन लोगों को देखें जो आज आपकी नजर में सफल हैं। आप भी चाहते होंगे कि काश हम भी इनकी तरह सफल हो पाते। अगर आपको ऐसा लगता है तो अपने उन सभी काम या JOB / रोज़गार को देखें और साथ ही साथ यह भी देखें कि आपकी अपनी मेहनत और रुचि कितनी थी अपने JOB या काम या COMPETITION को ऊंचाई पर ले जाने की। 

किसी को भी क़ामयाबी तब तक नहीं मिलती जब तक इन्सान खुद को उस काम को सफल बनाने में पूरी तरह तल्लीन नहीं कर देता या यूँ कह लो कि भूल जाता है कि दुनिया में इस काम के अलावा भी कुछ और है। 

 

शायद आपने भी सुना हो :--

                            कामयाबी की एक 

                               खास बात है....

                          कि वह मेहनत करने 

                            वालों पर फिदा हो 

                                   जाती है। 

 

एक और सूफी कहावत है कि :------

                     इश्क़ इस जहान में तब तक मुक़म्मल नहीं होता , 

                                 जब तक वो ख़ुदा से ना हो  

                               और जिसको खुदा से इश्क़ हो    

                            उसके जैसा फिर आशिक़ नहीं होता।  

 

यही कशिश अगर इन्सान अपने काम में रखे तो निश्चित ही निरन्तर अपने आपको सफलतम व्यक्ति बना सकता है बस इस बात का विशेष ध्यान रखें कि  आपको अगर अपनी ज़िन्दगी में , अपने कामों में सफल होना है तो नियम बनायें। 

 सुबह से लेकर रात तक अपने हर काम का TIME - MANAGEMENT यानि समय सीमा निश्चित करें क्यूँकि आपके पास सिर्फ़ 24 HOURS /घंटे ही हैं। इन्हीं समय - सीमा में अगर आप एकाग्र होकर अपने काम को यह मान कर करेंगे कि "WORK IS WORSHIP " तो आप उन सभी लोगों की लाइन में खुद को भी खड़ा पाएंगे जो आज आपकी नज़र में सफल व्यक्ति हैं। 

 

               आज से और अभी से ही अपने इष्ट /भगवान /GOD का नाम लेकर अपने काम को सही TECHNIQUE / कौशल से शुरू करें और अपने प्रयास को रोज़ थोड़ा और ज्यादा समय देकर निरन्तर सफल होने की कोशिश करतें रहें। 


 

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