"RELATION BETWEEN MOTHER & SON"
माँ बेटे के सम्बन्ध कैसे होने चाहिये ?
"माँ" वो शब्द जिसको बच्चा सबसे पहले बोलना सीखता है और माँ के गर्भ से ही उसके साथ अपना सम्बन्ध महसूस करता है , इसी तरह माँ भी बच्चे की धड़कन को ताउम्र महसूस करती है,वो माँ के पास हो या दूर "माँ " को बच्चे की फ़िक्र हमेशा रहती है।
किसी ने क्या खूब कहा है :-
सारी रौनक़ देख ली
ज़माने की मगर..
जो सुकून तेरे पहलू में है
वो कहीं भी नहीं।
माँ बच्चे की प्रथम पाठशाला कही जाती है। माँ ही बच्चे को बोलना सीखाती है , उसमें भी सबसे पहला शब्द "ॐ " या फिर "राम राम " ही होता है।
अक्सर लोग कहते हैं कि माँ के लिये बेटा ही आँख का तारा होता है और माँ अपनी परवरिश में अक्सर यह भूल जाती है कि जायदा लाड़ - प्यार से बच्चे बिगड़ भी जाते हैं। शायद यह सही भी हो सकता है क्यूँकि कहीं - कहीं आज भी बेटों को ही ज्यादा माना जाता है लेकिन अब सब जगह ऐसा नहीं है। आज बेटा - बेटी दोनों को ही समान प्यार और परवरिश दी जाती है।
माँ और बेटे के सम्बन्ध कैसे होने चाहिये :-
अगर देखा जाए तो हर माँ अपने बेटे से बहुत प्यार करती है। बेटे को जन्म देने के बाद से ही उसकी हर कोशिश होती है कि उसका बेटा सबसे अच्छा और काबिल बने। बेटे को भी अपनी माँ से बहुत प्यार होता है।
जब तक बेटा छोटा है तब तक तो माँ को अपने बेटे की हर मांग जायज़ लगती है और अगर माँ को ना भी लगे तब भी परिवार के बाकी सदस्य कह देते हैं कि "कोई बात नहीं बच्चा है" लेकिन समय के साथ बच्चे में बहुत सारी बातें , आदतें ऐसी बन जाती है कि बाद में उन खराब आदतों के कारण बेटा अपनी लाइफ में struggle / संघर्ष नहीं कर पाता और failure / हार का सामना करता है।
21 st century / सदी में माँ के पास अपने बच्चों की परवरिश के साथ -साथ इस बात की भी बागडोर हाथ में आ गई है कि वो अपने बेटे का carrier or उसकी life की हर छोटी - बड़ी प्रॉब्लम को solve करें। मानिये यकीन , इस अधिकार को आज 21 st century में पाकर हर माँ के चेहरे पर रौनक है क्यूँकि जिस बेटे को नौ महीने अपनी कोख में संभाला उसको ज़िन्दगी में संभालना कौन - सी बड़ी चुनौती है।
"21st century or relationship between mother and son"
क्या आज यह आसान है ?
हम तो यही कहेंगे कि आज के दौर में बच्चों की परवरिश उस आग के दरिया के समान है जिसमें डूब के जाना है।
आज माँ सिर्फ़ रसोई , कपड़ों और बाकी जरूरतों को ही नहीं पूरा करती , बल्कि माँ को बेटे की education / शिक्षा , friends , extra other activities पर भी पूरी नज़र रखनी पड़ती है। कभी -कभी तो माँ को बेटे से सुनना पड़ता है कि आप रहने दो , आप से नहीं होगा , या आप को नये ज़माने की समझ नहीं है।
माँ - बेटे के सम्बन्ध अच्छे हों इसके लिये दोनों के बीच आपसी समझ बेटे के बचपन से ही विकसित करनी बहुत जरुरी है।
बहुत जरुरी है कि माँ भी आज के समयनुसार स्वयं को update रखे ताकि 21st century के up - downs को समझे और बेटे के भीतर भी इस बात का विश्वास हो कि माँ से मैं हर प्रॉब्लम और decision share कर सकता हूँ।
इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी है कि दीवारें तभी ज्यादा ऊँची होंगी जब नींव मज़बूत होगी इसलिये पहल माँ को ही करनी होगी जिससे माँ - बेटे के सम्बन्धों में अपनापन और समझदारी की ऐसी नींव पड़ें कि उम्र भर माँ - बेटे के सम्बन्ध बहुत मधुर बने रहें।
🙏😊🙏
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