"HOW TO MAINTAIN YOUR BUDGET"
घरेलु खर्चे कैसे पूरे करें?
एक वक़्त था, जब कहा जाता था कि मुट्ठी में पैसे ले जाते थे और थैला भर कर सामान लाते थे। आज वो वक़्त है जब , थैला / बैग भरकर पैसा ले जाते हैं और मुट्ठी भर सामान आता है।
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दोस्तों , पहले परिवार का एक इंसान काम करता था और पूरा परिवार सुख से गुजारा कर लेता था लेकिन आज पूरा परिवार काम करता है तब कहीं सही तरीक़े से घरेलू ख़र्चे पूरे पड़ते हैं , कहीं - कहीं तो उसमें भी बहुत परेशानियां और उलझनें हैं।
आज आप देख ही रहें हैं कि महँगाई कितनी ज्यादा है और परिवार में हर सदस्य की अपनी ज़रूरतें।
अगर आपको घर से बाहर जाना है तो आपको सबसे पहले अपना two wheeler / four wheeler चाहिये।
इंसान की पहली जरूरत खाना / भोजन है जिसके लिये GROCERY / किराणा से सामान चाहिये।
बच्चों की शिक्षा के लिये अच्छा स्कूल चाहिये।
अच्छे कपड़े पहनने के लिये होने चाहिये ताकि समाज़ में WELL DRESSED , HIGH PROFILE दिखाई दें।
कोई परिवार का बुज़ुर्ग सदस्य अगर बीमार हो जाए तो उसके इलाज़ के लिये आजकल हज़ारों नहीं , लाखों रुपए ख़र्च करने पड़तें हैं।
यह कहना शायद गलत नहीं होगा कि हर पीढ़ी के सामने यही सवाल होता है कि बहुत महँगाई है। यानि हम यह कह सकते हैं कि महँगाई का topic / विषय ऐसा मुद्दा है जो ज्वलंत विषय है या स्पष्ट शब्दों में कहूँ तो "TIMELESS PROBLEM"
आजकल financial problem / वित्तीय समस्या की बहुत समस्या है। इन्सान जितना भी कमाता है वो कम ही पड़ता है।
PETROL / पेट्रोल , DIESEL /डीज़ल , LPG GAS
PRICE / दाम बढ़ने के साथ सभी चीज़े महँगी हो जाती हैं , जिसकी वज़ह से घरेलू ख़र्चे पूरे करने में भी बहुत परेशानी होती है।
"HOW TO MAINTAIN YOUR BUDGET"
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MAKE SMARTLY MONTHLY BUDGET
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महीने का खर्चों का हिसाब किताब चतुराई से बनाये
USE 50 : 30 : 20 FORMULA
सभी परिवारों की आय अलग - अलग होती है ,
लेकिन जरूरतें सबकी एक जैसी ही होती है : रोटी, कपड़ा, मकान।
रोटी , कपड़ा और मकान के साथ अब परिवार के सदस्यों की इच्छायें यानि wish भी जुड़ गई है और बचत करना भी।
{1} 50 : घर की मुख्य जरूरते
{2} 30 : परिवार की wish / चाहतों के लिये
{3} 20 : बचत के लिये
हो सकता है कि अब आप सोच रहें होंगे , यह कैसे होगा क्यूँकि आय तो उतनी ही है।
अब आप अगर सम्भव हो तो अपने पिता जी की आय पूछें , साथ ही साथ उस वक़्त की सभी चीज़ों का भाव। अगर आपके पिता उस वक़्त घर चला लेते थे , सारे खर्च पूरे कर लेते थे लेकिन बचत कम होती थी या ना भी कर पातें हों क्यूँकि पहले तीन / चार बच्चे होते थे जिससे ख़र्चे भी जायदा थे लेकिन आज के समय में बच्चे चाहे एक / दो ही हों लेकिन life style बहुत ख़र्चीला बन गया है।
daily needs / रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करें , बहुत किफ़ायत से।
स्टाइल और स्टेटस के चक्कर में अपने बजट की धज्जियाँ मत उड़ाना क्यूँकि जरूरत के वक़्त आप अपने मैदान में अकेले खिलाड़ी होंगे।
दोस्तों , आज फिर से अपना बजट बनाओ , देखो आपकी आय का कौन - सा हिस्सा फ़िज़ूलखर्च है। उस बचे हुए पैसों को आप बचत के रुप में सहेज कर रखें और भविष्य में उसी बचत से आप कुछ बेहतर कर सकतें हैं।
धीरे - धीरे ही सही , बूंद-बूंद से घट भरता है।
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