RELATIONSHIP BETWEEN FATHER & SON
" पिता - पुत्र के सम्बन्ध कैसे होने चाहिये?"
क्या देश और क्या विदेश , जब भी संबंधों की बात होती है तो अक्सर देखा गया है कि हर इन्सान का अपनों के साथ बहुत ही प्यार और लगाव का रिश्ता होता है।
पिता -पुत्र का रिश्ता भी बहुत ही भावनात्मक कहा जाता है। कुछ दशकों पहले हमारे घरों में पुत्र को बहुत जायदा तवजो दी जाती थी , आज भी प्यार करते हैं लेकिन पुत्र के साथ - साथ बेटी को भी तवजो / महत्त्व / मान दिया जाता है।
बात चाहे किसी भी घर या देश की हो , पिता और पुत्र के बीच understanding को महत्व दिया जाता है। किसी भी पिता के लिये वो पल / वक़्त बहुत फक्र / सम्मान का होता है जब उसका बेटा कोई सम्मान प्राप्त करता है।
पिता और पुत्र के बीच सामंजस्य / तालमेल का होना बहुत जरुरी है क्यूँकि परिवार की जिम्मेदारी आगे चलकर पुत्र को ही निभानी होती है।
पिता और पुत्र के रिश्ते में अपनापन तो होना ही चाहिये , साथ ही साथ पिता को
पुत्र को अनुशासन का पालन भी सीखाना चाहिये जिससे बेटा अपने जीवन को भी समझदारी के साथ ,
सुचारू रुप से चला सके।
बदलते वक़्त में , नए आविष्कारों को किस तरह समझना है , इसकी जानकारी
भी पिता और बेटे को आपस में जरुर share करनी चाहिए।
बचपन से ही पिता अपने बेटे को सीखने की आदत डाले , खेल -खेल में कुछ
puzzles solve करने दे जिससे आगे चलकर बेटा life में आनेवाली problems को आसानी से solve
कर सके।
जितना पिता technology को सिखाय उतना ही ध्यान अपने बेटे को संस्कारों को
सीखाने में भी लगाए जिससे बेटा जब बड़ा हो तब दोनों के सम्बन्ध मर्यादित हों , सफल जीवन तब ही
सम्भव है जब आपके परिवार में सब लोग आपसी प्रेम , जागरूकता और कामयाब होकर अपने कार्यों
में , रोज़गार में भी सफल हों।
" सम्बन्ध उतने ही निखरते हैं जितना हम संबंधों के साथ सही दिशा में मेहनत करतें हैं।"
" कहते हैं कि बेटी को परखना है तो माँ को देखो और पुत्र की आदतों को देखना है तो पिता को"
हर पिता को चाहिए कि अपने बेटे को बचपन से ही अपने नज़दीक होने का अहसास
करवाता रहे जिससे युवावस्था में बेटा अपने पिता से अपनी सारी problems , happiness , query सब
कुछ आसानी से शेयर कर सके।
बेटे को भी अपने पिता के मान - सम्मान को मानते हुए , अपनी life को आगे
बढ़ाना चाहिये। कई बार life में बहुत बार परेशानियां आती है जिसका solution हर पिता आसानी से
कर देता है क्यूँकि हर पिता , कभी खुद भी जीवन के उस दौर से निकल कर आता है।
" बहुत आसान है अपने बेटे को डांट देना , उसकी छोटी -बड़ी गलती पर बेटे को नकारा कह देना।"
YA
" बहुत आसान है अपने पिता को पुराने ज़माने का कह देना"
लेकिन
इतना मुश्किल कभी भी नहीं है
बेटे का अपने पिता को प्यार से पापा कहकर गले से लिपट जाना और पिता का अपने बेटे को कसकर अपनी बाँहों में बचपन जैसा समा लेना।
दोस्तों , परिवार है ,अपना खून है ,अपने माता-पिता हैं , अपने बच्चे हैं।
"सम्बन्धों को संभाल कर रखें क्यूँकि अपनों में और अपने जैसों में बहुत अंतर होता है।"
🙏😊🙏
Bhot pyara ❤️
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