😊HELLO FRIENDS....नमस्कार 😊
दोस्तों ,कैसे हैं आप सब
कल के ब्लॉग में दोस्तों मैंने बात की थी उन बुर्जुगों की ,जो किसी के parents थे और किसी ऐसी odd situation का ,या यूँ कह सकते हैं कि अपनों के पराएपन का सामना करके ,आज अपने हाथों से बनाए ,सवारें घर को छोड़ कर वृद्धाश्रम में रह रहें हैं।
दोस्तों ,आप ऊपर जो image देख रहे हैं वो आप सब को कहाँ की लग रही है ?
"घर या वृद्वाश्रम "
दोस्तों ,मैं आपको बता दूँ ये वृद्वाश्रम है 😊
कहते हैं कि....
पनाह मिल जाए रुह को जिसका हाथ छूकर ...
उसी हथेली पर घर बना लो ...
कई बार लोग सोचते हैं कि वृद्धाश्रम में रहने वाले लोगों का जीवन बहुत नीरस होगा और यह लोग बहुत ज़्यादा अपने बच्चों को याद करते होंगे। दोस्तों ,अपने तो अपने होते हैं अब उनको याद करने वाले parents अगर यहाँ रहकर याद करते हैं तो आप सोच सकते हैं कि उनकी भावनाये अपने बच्चों के लिये कैसी होंगी।
लेकिन ईश्वर की बनाई इस दुनियाँ में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो बेघर लोगों के लिये "नीड़ का निर्माण "करतें हैं। कई ऐसे समाज- सेवा करने वाले लोग हैं जो दिल से चाहते हैं कि ज़रूरत मंद लोगों की सेवा की जाए इसलिये ऐसी ही भावना वाले लोगों के साथ मिलकर वृद्धाश्रम की नींव रखते हैं। इन वृद्वाश्रम में सभी लोगों की उम्र के अनुसार ध्यान रखा जाता है।
कई NGOs के साथ मिलकर काम किये जाते हैं। वृद्ध लोगों के स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच की जाती है। इन सबके भोजन में पोषक तत्वों की सही मात्रा हो ,इसका भी पूरा ध्यान रखा जाता है।
यहाँ रहने वाले वृद्धजन खुश रहते हैं क्यूँकि उनका अकेलापन और नीरस जीवन ,तिरस्कार ,अपने जैसे लोगों की व्यथा सुनकर काफी कम हो जाता है। वो कहते है ना दोस्तों ,जब तक दूसरे के दिल का हाल ना सुनों तब तक वो बड़े नसीब वाला ही लगता है।
जब कभी यहाँ रहने वालों में से किसी का जन्मदिन आता है तो पूरी तैयारियाँ होती है जन्मदिन मनाने की। जैसा आपने ऊपर image में देखा भी।
वृद्धाश्रम में रहने वाले सभी बुजुर्गों को भी अपनी पिछली life को भूल कर अपने नए घर में बहुत आदर और सम्मान मिलने से अच्छा लगता हैं।
घर कभी भी ईट और गारे से नहीं बनता है दोस्तों ,घर को घर बनाता है आपसी प्रेम और विश्वास। इन बुजुर्ग लोगों की मुस्कान बताती है कि जो कल अपने बच्चों के लिये "नीड़ का निर्माण "कर रहे थे वो आज ख़ुद के लिये कर रहें हैं ,वो भी बहुत ख़ुशी के साथ।
श्री हरिवंश राय बच्चन जी की बहुत सुन्दर कविता की पंक्तियाँ है...
"नीड़ का निर्माण "
नीड़ का निर्माण फिर-फिर
नेह का आह्वान फिर -फिर !
वह उठी आँधी कि नभ में
छा गया सहसा अँधेरा ,
धूलि धूसर बादलों नें
भूमि को इस भाँति घेरा ,
रात -सा दिन हो गया ,फिर
रात आई और काली ,
लग रहा था अब न होगा
इस निशा का फिर सवेरा ,
रात के उत्पात -भय से
भीत जन -जन ,भीत कण -कण ,
किन्तु प्राची से उषा की
मोहनी मुस्कान फिर -फिर !
नीड़ का निर्माण फिर -फिर ,
नेह का आह्वान फिर -फिर !
😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊
SEE YOU SOON....
TILL THEN....
STAY HAPPY...
N HEALTHY....
😊 BYE BYE🙏
दोस्तों ,कैसे हैं आप सब
कल के ब्लॉग में दोस्तों मैंने बात की थी उन बुर्जुगों की ,जो किसी के parents थे और किसी ऐसी odd situation का ,या यूँ कह सकते हैं कि अपनों के पराएपन का सामना करके ,आज अपने हाथों से बनाए ,सवारें घर को छोड़ कर वृद्धाश्रम में रह रहें हैं।
दोस्तों ,आप ऊपर जो image देख रहे हैं वो आप सब को कहाँ की लग रही है ?
"घर या वृद्वाश्रम "
दोस्तों ,मैं आपको बता दूँ ये वृद्वाश्रम है 😊
कहते हैं कि....
पनाह मिल जाए रुह को जिसका हाथ छूकर ...
उसी हथेली पर घर बना लो ...
कई बार लोग सोचते हैं कि वृद्धाश्रम में रहने वाले लोगों का जीवन बहुत नीरस होगा और यह लोग बहुत ज़्यादा अपने बच्चों को याद करते होंगे। दोस्तों ,अपने तो अपने होते हैं अब उनको याद करने वाले parents अगर यहाँ रहकर याद करते हैं तो आप सोच सकते हैं कि उनकी भावनाये अपने बच्चों के लिये कैसी होंगी।
लेकिन ईश्वर की बनाई इस दुनियाँ में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो बेघर लोगों के लिये "नीड़ का निर्माण "करतें हैं। कई ऐसे समाज- सेवा करने वाले लोग हैं जो दिल से चाहते हैं कि ज़रूरत मंद लोगों की सेवा की जाए इसलिये ऐसी ही भावना वाले लोगों के साथ मिलकर वृद्धाश्रम की नींव रखते हैं। इन वृद्वाश्रम में सभी लोगों की उम्र के अनुसार ध्यान रखा जाता है।
कई NGOs के साथ मिलकर काम किये जाते हैं। वृद्ध लोगों के स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच की जाती है। इन सबके भोजन में पोषक तत्वों की सही मात्रा हो ,इसका भी पूरा ध्यान रखा जाता है।
यहाँ रहने वाले वृद्धजन खुश रहते हैं क्यूँकि उनका अकेलापन और नीरस जीवन ,तिरस्कार ,अपने जैसे लोगों की व्यथा सुनकर काफी कम हो जाता है। वो कहते है ना दोस्तों ,जब तक दूसरे के दिल का हाल ना सुनों तब तक वो बड़े नसीब वाला ही लगता है।
जब कभी यहाँ रहने वालों में से किसी का जन्मदिन आता है तो पूरी तैयारियाँ होती है जन्मदिन मनाने की। जैसा आपने ऊपर image में देखा भी।
वृद्धाश्रम में रहने वाले सभी बुजुर्गों को भी अपनी पिछली life को भूल कर अपने नए घर में बहुत आदर और सम्मान मिलने से अच्छा लगता हैं।
घर कभी भी ईट और गारे से नहीं बनता है दोस्तों ,घर को घर बनाता है आपसी प्रेम और विश्वास। इन बुजुर्ग लोगों की मुस्कान बताती है कि जो कल अपने बच्चों के लिये "नीड़ का निर्माण "कर रहे थे वो आज ख़ुद के लिये कर रहें हैं ,वो भी बहुत ख़ुशी के साथ।
श्री हरिवंश राय बच्चन जी की बहुत सुन्दर कविता की पंक्तियाँ है...
"नीड़ का निर्माण "
नीड़ का निर्माण फिर-फिर
नेह का आह्वान फिर -फिर !
वह उठी आँधी कि नभ में
छा गया सहसा अँधेरा ,
धूलि धूसर बादलों नें
भूमि को इस भाँति घेरा ,
रात -सा दिन हो गया ,फिर
रात आई और काली ,
लग रहा था अब न होगा
इस निशा का फिर सवेरा ,
रात के उत्पात -भय से
भीत जन -जन ,भीत कण -कण ,
किन्तु प्राची से उषा की
मोहनी मुस्कान फिर -फिर !
नीड़ का निर्माण फिर -फिर ,
नेह का आह्वान फिर -फिर !
😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊
SEE YOU SOON....
TILL THEN....
STAY HAPPY...
N HEALTHY....
😊 BYE BYE🙏

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